- पिया बाज प्याला पिया जाए ना : क़ुली क़ुतुब शाह
- मदन मस्त बदल मस्त कजन मस्त परी मस्त : क़ुली क़ुतुब शाह
- हमारा सजन ख़ुश-नज़र बाज़ है : क़ुली क़ुतुब शाह
- पिया के नयन में बहुत छंद है : क़ुली क़ुतुब शाह
- तिरे दरसन की मैं हूँ साईं माती : क़ुली क़ुतुब शाह
- प्यारी के नैनाँ हैं जैसे कटारे : क़ुली क़ुतुब शाह
- तुमन रौशनी बिन हमन रौशनी नाह : क़ुली क़ुतुब शाह
- ख़बर लियाया है हुदहुद मेरे तईं उस यार-ए-जानी का : क़ुली क़ुतुब शाह
- नज़र तज पे है क्या तमाशा का हाजत : क़ुली क़ुतुब शाह
- सकी तुज ज़ुल्फ़ है जीवाँ के आख़िज़ : क़ुली क़ुतुब शाह
पिया बाज प्याला पिया जाए ना : क़ुली क़ुतुब शाह
पिया बाज प्याला पिया जाए नापिया बाज यक तिल जिया जाए ना
कहे थे पिया बिन सुबूरी करूँ
खया जाए अम्मा किया जाए ना
नहीं 'इश्क़ जिस दू बड़ा कोड़ है
कधीं उस से मिल बे-सिया जाए ना
'क़ुतुब' शह न दे मुज दिवाने को पंद
दिवाने कूँ कुच पंद दिया जाए ना
मदन मस्त बदल मस्त कजन मस्त परी मस्त : क़ुली क़ुतुब शाह
मदन मस्त बदल मस्त कजन मस्त परी मस्तहुई मस्त पवन मस्त लगन मस्त परी मस्त
चढ़ी मस्त बही मस्त डली मस्त रही मस्त
मुखा मस्त सदा मस्त सहन मस्त परी मस्त
खड़ी मस्त अंचल मस्त ढली मस्त ओढ़ी मस्त
गज़क मस्त नुक़ल मस्त बचन मस्त परी मस्त
परी मस्त पिवन मस्त सुरा मस्त हुइ मस्त
मिली मस्त खिजी मस्त रसन मस्त परी मस्त
खुपा मस्त फुलाँ मस्त कजल मस्त खुली मस्त
लटाँ मस्त नयन मस्त देखन मस्त परी मस्त
तिला मस्त तुरा मस्त धरी मस्त धड़ी मस्त
शकर मस्त चुमन मस्त हँसन मस्त परी मस्त
चोली मस्त खुली मस्त कमल मस्त भँवर मस्त
'क़ुतुब' मस्त करी मस्त युवन मस्त परी मस्त
हमारा सजन ख़ुश-नज़र बाज़ है : क़ुली क़ुतुब शाह
हमारा सजन ख़ुश-नज़र बाज़ हैतो उस दिल में सब 'इश्क़ का राज़ है
गले हाथ दे खेले नारियाँ सूँ खेल
जिसूँ खेले पीव ऊ सर-अफ़राज़ है
अधर रंग भरे सुहते मानिक नमन
कि याक़ूत रंग उन थे वरसाज़ है
सकियाँ साईं छंद सूँ पँवाए अपस
तुमन हुस्न के तीं सो ऊ नाज़ है
सँवारे हैं मज्लिस पिया रूप सूँ
मदन मुतरिब उस में ख़ुश-आवाज़ है
सँवाँरया है मन-मोहनियाँ अपने तीं
पिया कूँ ऐनू सूँ तुर्क ताज़ है
नबी सदक़े 'क़ुतबा' पे आनंद-दार
'अली की मया थे सदा बाज़ है
पिया के नयन में बहुत छंद है : क़ुली क़ुतुब शाह
पिया के नयन में बहुत छंद हैओ दो ज़ुल्फ़ में जीव का आनंद है
सजन यूँ मिठाई सूँ बोले बचन
कि उस ख़ुश बचन में लज़्ज़त क़ंद है
मोहन के ओ दो गाल तश्बीह में
सुरज एक दूजा सो जूँ चंद है
नवल मुख सुहे हुस्न का फूलबन
नयन मृग होर ज़ुल्फ़ उस फंद है
ऊ किसवत थे जीव बास महके सदा
तू ऊ बास नारियाँ का दिल-बंद है
पिया कूँ बुला लियाए हूँ अप मंदिर
दुतन मन में उस थे हमन दंद है
नबी सदक़े 'क़ुतबा' कूँ अप सेज ल्याइ
तो चाैंधर ख़ुशियाँ होर आनंद है
तिरे दरसन की मैं हूँ साईं माती : क़ुली क़ुतुब शाह
तिरे दरसन की मैं हूँ साईं मातीमुजे लावो पिया छाती सूँ छाती
पियारे हात धर सँभालो मुंज कूँ
कि तिल तिल दूती तुज माती डराती
परम प्याला पिलावो मुंज कूँ दम दम
कि तूँ है दो जगत में मुंज संगाती
न राखूँ तुज नयन में राखूँ दिल में
कि तूँ मेरा पियारा जीव का साती
पिया के ध्यान सूँ मैं मस्त हूँ मस्त
मुंजे बिरहे के बीनाँ की सुनाती
अगर यक तिल पड़े अंतर पिया सूँ
नयन जल सूँ सपत समुद्र भराती
नबी सदक़े कहे 'क़ुतबा' की प्यारी
रिझा दम दम अधर प्याला पिलाती
प्यारी के नैनाँ हैं जैसे कटारे : क़ुली क़ुतुब शाह
प्यारी के नैनाँ हैं जैसे कटारेन सम उस के अंगे कोई हैं दो धारे
असर तुज मोहब्बत का जिस कूँ चड़ेगा
तिरे ला'ल बिन उस कूँ कोई न उतारे
दो लोचन हैं तेरे निसंग चोर रावत
ओ नो सूँ दिलेरी न कर सब ही हारे
सुहाता है तुज कूँ गुमाँ होर ग़रूरी
कि माते अहें तुज हुस्न के प्यारे
सकियाँ में तू है मिर्ग-नैनी छबेली
सजन तू नहीं होते तुज थे किनारे
'अजब चपख़लाई है तेरी नयन में
कि खंजन नमन एक तिल कईं न ठारे
नबी सदक़े 'क़ुतबा' सूँ मद पीवे जम-जम
वो चंद मुख कि जिस मुख थे जूती सिंगारे
तुमन रौशनी बिन हमन रौशनी नाह : क़ुली क़ुतुब शाह
तुमन रौशनी बिन हमन रौशनी नाहतू दीदार बिन सभी दीदार हैं काह
सभी झाड़ कूँ पत-झड़ी बाव आया
चकर खाँस पर है नज़र तू दिसूँ शाह
तुमन ख़्याल सेती हमें ख़्याल बाँधे
रक़ीबाँ न बूझें ये बात आह है आह
नमाज़ाँ करूँ रात दिन मलने क्याँ मैं
हवा मुंज कूँ रोज़ी ज़ुलहमदुल्लिाह
अंधारे के बादल मुंजे बेड़ी चौ-पहर
ख़ुदाया तू भेजें हमन बाद-ए-दिल-ख़्वाह
कता सब्र फ़रियाद कर चुप न रह तूँ
करूँ आह आहाँ तूँ नीं होता आगाह
हुआ बे-क़रार आह आहाँ ते मैं अब
नज़र बा-मुंज उपर दसूँगा कि जियूँ माह
करेगा अगर याद वो मुंज दुखी कूँ
करूँ याद अगर किस कूँ असतग़फ़िरुल्लाह
'मअानी' है आजिज़ तिरी ख़िदमताँ में
नहीं सुद-बुद उस कूँ तूँ कर सब थे आगाह
ख़बर लियाया है हुदहुद मेरे तईं उस यार-ए-जानी का : क़ुली क़ुतुब शाह
ख़बर लियाया है हुदहुद मेरे तईं उस यार-ए-जानी काख़ुशी का वक़्त है ज़ाहिर करूँ राज़-ए-निहानी का
मिरे जीव आरसी में ख़याल तुज मुख का सो दिस्ता है
करे ऊ ख़याल मुंज दिल में निशानी ज़र-फ़िशानी का
चिता हो 'इश्क़ के जंगल में बैठा है दरी ले कर
लिया है झाँप सूँ आहू नमन दिल मुंज अयानी का
ख़ुदा का शुक्र है तुज सल्तनत थे काम पाया हूँ
दँदे दुश्मन के मुख पर पियूता मय अर्ग़वानी का
छबीले मस्त साक़ी के पिछें दौड़े सौ मख़मूराँ
पिलाओ मय हवा अब तो हुआ है गुल-फ़िशानी का
हमें हैं 'इश्क़ के पंनथ में दोनो 'आलम थे बे-परवा
लगया है दाग़ मुंज दिल पर उस हिन्दोस्तानी का
पड़े दुम्बाल में मेरे सो उस नैनाँ के दुम्बाले
ख़ुदाया 'इश्क़ मुश्किल है भरम रख तूँ म'आनी का
नज़र तज पे है क्या तमाशा का हाजत : क़ुली क़ुतुब शाह
नज़र तज पे है क्या तमाशा का हाजतनहीं सब्ज़ ख़त आगे चम्पा का हाजत
तबीबाँ करें मुंज कूँ बाली सूँ दारू
कि बाली हैं मोहन है बाला का हाजत
हमीं नेशकर नमने हिलजे हैं बंद में
नहीं होर हमना कूँ जाला का हाजत
ख़ुमारी नयन थे खिले फूल जीव में
नहीं मू को दूना ओ बाला का हाजत
मिरा दिल है ज़र-बफ़्त का कारख़ाना
नहीं मुंज कूँ बाज़ार वाला का हाजत
तू कहनियाँ किताबाँ के जीव में लिख्या हूँ
मुअम्मा है नीं खोल कहना का हाजत
अँगूठी सुलैमाँ की तुज हात में है
सिकंदर के दर्पन उजाला का हाजत
मिरा दिल कुंदन हुस्न का खान है तू
नहीं है सुनारी तक़ाज़ा का हाजत
हमन मुद्द'आ मुद्द'ई ना बुझे कुच
नको बहस करनीं है आ'दा का हाजत
'मआनी' तिरा ज़र-गरी कोई न बूझें
कि इस 'इल्म में नीं है दाना का हाजत
सकी तुज ज़ुल्फ़ है जीवाँ के आख़िज़ : क़ुली क़ुतुब शाह
सकी तुज ज़ुल्फ़ है जीवाँ के आख़िज़दसन तेरे अहें रतनाँ के आख़िज़
तिरी नैनाँ थे पंचे हैं मंतर सब
तिरे नाज़ाँ हैं सब सुथराँ के आख़िज़
सहे तुज सीस परांचल सहेली
सहे सब आशिक़-ए-दर वाँ के आख़िज़
तिरी पुतलियाँ भलाइयाँ हैं जगत कूँ
नयन दो मस्त हैं मस्ताँ के आख़िज़
नखाँ मेरे हैं तुज जोबन के मुश्ताक़
अधर मेरे तिरे बोसियाँ के आख़िज़
'अली नान्वाँ ओ कहिया यू ग़ज़ल 'क़ुतुब'
'अली नान्वाँ हैं सब कामाँ के आख़िज़