क़ुली क़ुतुब शाह की ग़ज़लें : Kuli Kutub Shah Ghazal Hindi

पिया बाज प्याला पिया जाए ना : क़ुली क़ुतुब शाह

पिया बाज प्याला पिया जाए ना
पिया बाज यक तिल जिया जाए ना
कहे थे पिया बिन सुबूरी करूँ
खया जाए अम्मा किया जाए ना
नहीं 'इश्क़ जिस दू बड़ा कोड़ है
कधीं उस से मिल बे-सिया जाए ना
'क़ुतुब' शह न दे मुज दिवाने को पंद
दिवाने कूँ कुच पंद दिया जाए ना

मदन मस्त बदल मस्त कजन मस्त परी मस्त : क़ुली क़ुतुब शाह

मदन मस्त बदल मस्त कजन मस्त परी मस्त
हुई मस्त पवन मस्त लगन मस्त परी मस्त
चढ़ी मस्त बही मस्त डली मस्त रही मस्त
मुखा मस्त सदा मस्त सहन मस्त परी मस्त
खड़ी मस्त अंचल मस्त ढली मस्त ओढ़ी मस्त
गज़क मस्त नुक़ल मस्त बचन मस्त परी मस्त
परी मस्त पिवन मस्त सुरा मस्त हुइ मस्त
मिली मस्त खिजी मस्त रसन मस्त परी मस्त
खुपा मस्त फुलाँ मस्त कजल मस्त खुली मस्त
लटाँ मस्त नयन मस्त देखन मस्त परी मस्त
तिला मस्त तुरा मस्त धरी मस्त धड़ी मस्त
शकर मस्त चुमन मस्त हँसन मस्त परी मस्त
चोली मस्त खुली मस्त कमल मस्त भँवर मस्त
'क़ुतुब' मस्त करी मस्त युवन मस्त परी मस्त

हमारा सजन ख़ुश-नज़र बाज़ है : क़ुली क़ुतुब शाह

हमारा सजन ख़ुश-नज़र बाज़ है
तो उस दिल में सब 'इश्क़ का राज़ है
गले हाथ दे खेले नारियाँ सूँ खेल
जिसूँ खेले पीव ऊ सर-अफ़राज़ है
अधर रंग भरे सुहते मानिक नमन
कि याक़ूत रंग उन थे वरसाज़ है
सकियाँ साईं छंद सूँ पँवाए अपस
तुमन हुस्न के तीं सो ऊ नाज़ है
सँवारे हैं मज्लिस पिया रूप सूँ
मदन मुतरिब उस में ख़ुश-आवाज़ है
सँवाँरया है मन-मोहनियाँ अपने तीं
पिया कूँ ऐनू सूँ तुर्क ताज़ है
नबी सदक़े 'क़ुतबा' पे आनंद-दार
'अली की मया थे सदा बाज़ है

पिया के नयन में बहुत छंद है : क़ुली क़ुतुब शाह

पिया के नयन में बहुत छंद है
ओ दो ज़ुल्फ़ में जीव का आनंद है
सजन यूँ मिठाई सूँ बोले बचन
कि उस ख़ुश बचन में लज़्ज़त क़ंद है
मोहन के ओ दो गाल तश्बीह में
सुरज एक दूजा सो जूँ चंद है
नवल मुख सुहे हुस्न का फूलबन
नयन मृग होर ज़ुल्फ़ उस फंद है
ऊ किसवत थे जीव बास महके सदा
तू ऊ बास नारियाँ का दिल-बंद है
पिया कूँ बुला लियाए हूँ अप मंदिर
दुतन मन में उस थे हमन दंद है
नबी सदक़े 'क़ुतबा' कूँ अप सेज ल्याइ
तो चाैंधर ख़ुशियाँ होर आनंद है

तिरे दरसन की मैं हूँ साईं माती : क़ुली क़ुतुब शाह

तिरे दरसन की मैं हूँ साईं माती
मुजे लावो पिया छाती सूँ छाती
पियारे हात धर सँभालो मुंज कूँ
कि तिल तिल दूती तुज माती डराती
परम प्याला पिलावो मुंज कूँ दम दम
कि तूँ है दो जगत में मुंज संगाती
न राखूँ तुज नयन में राखूँ दिल में
कि तूँ मेरा पियारा जीव का साती
पिया के ध्यान सूँ मैं मस्त हूँ मस्त
मुंजे बिरहे के बीनाँ की सुनाती
अगर यक तिल पड़े अंतर पिया सूँ
नयन जल सूँ सपत समुद्र भराती
नबी सदक़े कहे 'क़ुतबा' की प्यारी
रिझा दम दम अधर प्याला पिलाती

प्यारी के नैनाँ हैं जैसे कटारे : क़ुली क़ुतुब शाह

प्यारी के नैनाँ हैं जैसे कटारे
न सम उस के अंगे कोई हैं दो धारे
असर तुज मोहब्बत का जिस कूँ चड़ेगा
तिरे ला'ल बिन उस कूँ कोई न उतारे
दो लोचन हैं तेरे निसंग चोर रावत
ओ नो सूँ दिलेरी न कर सब ही हारे
सुहाता है तुज कूँ गुमाँ होर ग़रूरी
कि माते अहें तुज हुस्न के प्यारे
सकियाँ में तू है मिर्ग-नैनी छबेली
सजन तू नहीं होते तुज थे किनारे
'अजब चपख़लाई है तेरी नयन में
कि खंजन नमन एक तिल कईं न ठारे
नबी सदक़े 'क़ुतबा' सूँ मद पीवे जम-जम
वो चंद मुख कि जिस मुख थे जूती सिंगारे

तुमन रौशनी बिन हमन रौशनी नाह : क़ुली क़ुतुब शाह

तुमन रौशनी बिन हमन रौशनी नाह
तू दीदार बिन सभी दीदार हैं काह
सभी झाड़ कूँ पत-झड़ी बाव आया
चकर खाँस पर है नज़र तू दिसूँ शाह
तुमन ख़्याल सेती हमें ख़्याल बाँधे
रक़ीबाँ न बूझें ये बात आह है आह
नमाज़ाँ करूँ रात दिन मलने क्याँ मैं
हवा मुंज कूँ रोज़ी ज़ुलहमदुल्लिाह
अंधारे के बादल मुंजे बेड़ी चौ-पहर
ख़ुदाया तू भेजें हमन बाद-ए-दिल-ख़्वाह
कता सब्र फ़रियाद कर चुप न रह तूँ
करूँ आह आहाँ तूँ नीं होता आगाह
हुआ बे-क़रार आह आहाँ ते मैं अब
नज़र बा-मुंज उपर दसूँगा कि जियूँ माह
करेगा अगर याद वो मुंज दुखी कूँ
करूँ याद अगर किस कूँ असतग़फ़िरुल्लाह
'मअानी' है आजिज़ तिरी ख़िदमताँ में
नहीं सुद-बुद उस कूँ तूँ कर सब थे आगाह

ख़बर लियाया है हुदहुद मेरे तईं उस यार-ए-जानी का : क़ुली क़ुतुब शाह

ख़बर लियाया है हुदहुद मेरे तईं उस यार-ए-जानी का
ख़ुशी का वक़्त है ज़ाहिर करूँ राज़-ए-निहानी का
मिरे जीव आरसी में ख़याल तुज मुख का सो दिस्ता है
करे ऊ ख़याल मुंज दिल में निशानी ज़र-फ़िशानी का
चिता हो 'इश्क़ के जंगल में बैठा है दरी ले कर
लिया है झाँप सूँ आहू नमन दिल मुंज अयानी का
ख़ुदा का शुक्र है तुज सल्तनत थे काम पाया हूँ
दँदे दुश्मन के मुख पर पियूता मय अर्ग़वानी का
छबीले मस्त साक़ी के पिछें दौड़े सौ मख़मूराँ
पिलाओ मय हवा अब तो हुआ है गुल-फ़िशानी का
हमें हैं 'इश्क़ के पंनथ में दोनो 'आलम थे बे-परवा
लगया है दाग़ मुंज दिल पर उस हिन्दोस्तानी का
पड़े दुम्बाल में मेरे सो उस नैनाँ के दुम्बाले
ख़ुदाया 'इश्क़ मुश्किल है भरम रख तूँ म'आनी का

नज़र तज पे है क्या तमाशा का हाजत : क़ुली क़ुतुब शाह

नज़र तज पे है क्या तमाशा का हाजत
नहीं सब्ज़ ख़त आगे चम्पा का हाजत
तबीबाँ करें मुंज कूँ बाली सूँ दारू
कि बाली हैं मोहन है बाला का हाजत
हमीं नेशकर नमने हिलजे हैं बंद में
नहीं होर हमना कूँ जाला का हाजत
ख़ुमारी नयन थे खिले फूल जीव में
नहीं मू को दूना ओ बाला का हाजत
मिरा दिल है ज़र-बफ़्त का कारख़ाना
नहीं मुंज कूँ बाज़ार वाला का हाजत
तू कहनियाँ किताबाँ के जीव में लिख्या हूँ
मुअम्मा है नीं खोल कहना का हाजत
अँगूठी सुलैमाँ की तुज हात में है
सिकंदर के दर्पन उजाला का हाजत
मिरा दिल कुंदन हुस्न का खान है तू
नहीं है सुनारी तक़ाज़ा का हाजत
हमन मुद्द'आ मुद्द'ई ना बुझे कुच
नको बहस करनीं है आ'दा का हाजत
'मआनी' तिरा ज़र-गरी कोई न बूझें
कि इस 'इल्म में नीं है दाना का हाजत

सकी तुज ज़ुल्फ़ है जीवाँ के आख़िज़ : क़ुली क़ुतुब शाह

सकी तुज ज़ुल्फ़ है जीवाँ के आख़िज़
दसन तेरे अहें रतनाँ के आख़िज़
तिरी नैनाँ थे पंचे हैं मंतर सब
तिरे नाज़ाँ हैं सब सुथराँ के आख़िज़
सहे तुज सीस परांचल सहेली
सहे सब आशिक़-ए-दर वाँ के आख़िज़
तिरी पुतलियाँ भलाइयाँ हैं जगत कूँ
नयन दो मस्त हैं मस्ताँ के आख़िज़
नखाँ मेरे हैं तुज जोबन के मुश्ताक़
अधर मेरे तिरे बोसियाँ के आख़िज़
'अली नान्वाँ ओ कहिया यू ग़ज़ल 'क़ुतुब'
'अली नान्वाँ हैं सब कामाँ के आख़िज़

ग़ुलाम अली की गाई हुईं ग़ज़लें हिंदी लिरिक्स : Ghulam Ali Ghazal Lyrics


वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो : मोमिन ख़ाँ मोमिन

वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो
वही या'नी वा'दा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो
वो जो लुत्फ़ मुझ पे थे बेशतर वो करम कि था मिरे हाल पर
मुझे सब है याद ज़रा ज़रा तुम्हें याद हो कि न याद हो
वो नए गिले वो शिकायतें वो मज़े मज़े की हिकायतें
वो हर एक बात पे रूठना तुम्हें याद हो कि न याद हो
कभी बैठे सब में जो रू-ब-रू तो इशारतों ही से गुफ़्तुगू
वो बयान शौक़ का बरमला तुम्हें याद हो कि न याद हो
हुए इत्तिफ़ाक़ से गर बहम तो वफ़ा जताने को दम-ब-दम
गिला-ए-मलामत-ए-अक़रिबा तुम्हें याद हो कि न याद हो
कोई बात ऐसी अगर हुई कि तुम्हारे जी को बुरी लगी
तो बयाँ से पहले ही भूलना तुम्हें याद हो कि न याद हो
कभी हम में तुम में भी चाह थी कभी हम से तुम से भी राह थी
कभी हम भी तुम भी थे आश्ना तुम्हें याद हो कि न याद हो
सुनो ज़िक्र है कई साल का कि किया इक आप ने वा'दा था
सो निबाहने का तो ज़िक्र क्या तुम्हें याद हो कि न याद हो
कहा मैं ने बात वो कोठे की मिरे दिल से साफ़ उतर गई
तो कहा कि जाने मिरी बला तुम्हें याद हो कि न याद हो
वो बिगड़ना वस्ल की रात का वो न मानना किसी बात का
वो नहीं नहीं की हर आन अदा तुम्हें याद हो कि न याद हो
जिसे आप गिनते थे आश्ना जिसे आप कहते थे बा-वफ़ा
मैं वही हूँ 'मोमिन'-ए-मुब्तला तुम्हें याद हो कि न याद हो

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है : हसरत मोहानी

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है
बा-हज़ाराँ इज़्तिराब ओ सद-हज़ाराँ इश्तियाक़
तुझ से वो पहले-पहल दिल का लगाना याद है
बार बार उठना उसी जानिब निगाह-ए-शौक़ का
और तिरा ग़ुर्फ़े से वो आँखें लड़ाना याद है
तुझ से कुछ मिलते ही वो बेबाक हो जाना मिरा
और तिरा दाँतों में वो उँगली दबाना याद है
खींच लेना वो मिरा पर्दे का कोना दफ़अ'तन
और दुपट्टे से तिरा वो मुँह छुपाना याद है
जान कर सोता तुझे वो क़स्द-ए-पा-बोसी मिरा
और तिरा ठुकरा के सर वो मुस्कुराना याद है
तुझ को जब तन्हा कभी पाना तो अज़-राह-ए-लिहाज़
हाल-ए-दिल बातों ही बातों में जताना याद है
जब सिवा मेरे तुम्हारा कोई दीवाना न था
सच कहो कुछ तुम को भी वो कार-ख़ाना याद है
ग़ैर की नज़रों से बच कर सब की मर्ज़ी के ख़िलाफ़
वो तिरा चोरी-छुपे रातों को आना याद है
आ गया गर वस्ल की शब भी कहीं ज़िक्र-ए-फ़िराक़
वो तिरा रो रो के मुझ को भी रुलाना याद है
दोपहर की धूप में मेरे बुलाने के लिए
वो तिरा कोठे पे नंगे पाँव आना याद है
आज तक नज़रों में है वो सोहबत-ए-राज़-ओ-नियाज़
अपना जाना याद है तेरा बुलाना याद है
मीठी मीठी छेड़ कर बातें निराली प्यार की
ज़िक्र दुश्मन का वो बातों में उड़ाना याद है
देखना मुझ को जो बरगश्ता तो सौ सौ नाज़ से
जब मना लेना तो फिर ख़ुद रूठ जाना याद है
चोरी चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह
मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है
शौक़ में मेहंदी के वो बे-दस्त-ओ-पा होना तिरा
और मिरा वो छेड़ना वो गुदगुदाना याद है
बावजूद-ए-इद्दिया-ए-इत्तिक़ा 'हसरत' मुझे
आज तक अहद-ए-हवस का वो फ़साना याद है

ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल दुराय नैनाँ बनाए बतियाँ : अमीर ख़ुसरो

ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल दुराय नैनाँ बनाए बतियाँ
कि ताब-ए-हिज्राँ नदारम ऐ जाँ न लेहू काहे लगाए छतियाँ
शबान-ए-हिज्राँ दराज़ चूँ ज़ुल्फ़ ओ रोज़-ए-वसलत चूँ उम्र-ए-कोताह
सखी पिया को जो मैं न देखूँ तो कैसे काटूँ अँधेरी रतियाँ
यकायक अज़ दिल दो चश्म जादू ब-सद-फ़रेबम ब-बुर्द तस्कीं
किसे पड़ी है जो जा सुनावे पियारे पी को हमारी बतियाँ
चूँ शम-ए-सोज़ाँ चूँ ज़र्रा हैराँ ज़ मेहर-ए-आँ-मह बगश्तम आख़िर
न नींद नैनाँ न अंग चैनाँ न आप आवे न भेजे पतियाँ
ब-हक्क-ए-रोज़-ए-विसाल-ए-दिलबर कि दाद मारा ग़रीब 'ख़ुसरव'
सपीत मन के वराय रखूँ जो जा के पाऊँ पिया की खतियाँ

कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा : इब्न-ए-इंशा

कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा
हम भी वहीं मौजूद थे हम से भी सब पूछा किए
हम हँस दिए हम चुप रहे मंज़ूर था पर्दा तिरा
इस शहर में किस से मिलें हम से तो छूटीं महफ़िलें
हर शख़्स तेरा नाम ले हर शख़्स दीवाना तिरा
कूचे को तेरे छोड़ कर जोगी ही बन जाएँ मगर
जंगल तिरे पर्बत तिरे बस्ती तिरी सहरा तिरा
हम और रस्म-ए-बंदगी आशुफ़्तगी उफ़्तादगी
एहसान है क्या क्या तिरा ऐ हुस्न-ए-बे-परवा तिरा
दो अश्क जाने किस लिए पलकों पे आ कर टिक गए
अल्ताफ़ की बारिश तिरी इकराम का दरिया तिरा
ऐ बे-दरेग़ ओ बे-अमाँ हम ने कभी की है फ़ुग़ाँ
हम को तिरी वहशत सही हम को सही सौदा तिरा
हम पर ये सख़्ती की नज़र हम हैं फ़क़ीर-ए-रहगुज़र
रस्ता कभी रोका तिरा दामन कभी थामा तिरा
हाँ हाँ तिरी सूरत हसीं लेकिन तू ऐसा भी नहीं
इक शख़्स के अशआ'र से शोहरा हुआ क्या क्या तिरा
बेदर्द सुननी हो तो चल कहता है क्या अच्छी ग़ज़ल
आशिक़ तिरा रुस्वा तिरा शाइर तिरा 'इंशा' तिरा

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है : अकबर इलाहाबादी

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है
डाका तो नहीं मारा चोरी तो नहीं की है
ना-तजरबा-कारी से वाइ'ज़ की ये हैं बातें
इस रंग को क्या जाने पूछो तो कभी पी है
उस मय से नहीं मतलब दिल जिस से है बेगाना
मक़्सूद है उस मय से दिल ही में जो खिंचती है
ऐ शौक़ वही मय पी ऐ होश ज़रा सो जा
मेहमान-ए-नज़र इस दम इक बर्क़-ए-तजल्ली है
वाँ दिल में कि सदमे दो याँ जी में कि सब सह लो
उन का भी अजब दिल है मेरा भी अजब जी है
हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से
हर साँस ये कहती है हम हैं तो ख़ुदा भी है
सूरज में लगे धब्बा फ़ितरत के करिश्मे हैं
बुत हम को कहें काफ़िर अल्लाह की मर्ज़ी है
ता'लीम का शोर ऐसा तहज़ीब का ग़ुल इतना
बरकत जो नहीं होती निय्यत की ख़राबी है
सच कहते हैं शैख़ 'अकबर' है ताअत-ए-हक़ लाज़िम
हाँ तर्क-ए-मय-ओ-शाहिद ये उन की बुज़ुर्गी है

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है : मीर तक़ी मीर

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
लगने न दे बस हो तो उस के गौहर-ए-गोश को बाले तक
उस को फ़लक चश्म-ए-मह-ओ-ख़ुर की पुतली का तारा जाने है
आगे उस मुतकब्बिर के हम ख़ुदा ख़ुदा किया करते हैं
कब मौजूद ख़ुदा को वो मग़रूर-ए-ख़ुद-आरा जाने है
आशिक़ सा तो सादा कोई और न होगा दुनिया में
जी के ज़ियाँ को इश्क़ में उस के अपना वारा जाने है
चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं
वर्ना दिलबर-ए-नादाँ भी इस दर्द का चारा जाने है
क्या ही शिकार-फ़रेबी पर मग़रूर है वो सय्याद बचा
ताइर उड़ते हवा में सारे अपने असारा जाने है
मेहर ओ वफ़ा ओ लुत्फ़-ओ-इनायत एक से वाक़िफ़ इन में नहीं
और तो सब कुछ तंज़ ओ किनाया रम्ज़ ओ इशारा जाने है
क्या क्या फ़ित्ने सर पर उस के लाता है माशूक़ अपना
जिस बे-दिल बे-ताब-ओ-तवाँ को इश्क़ का मारा जाने है
रख़नों से दीवार-ए-चमन के मुँह को ले है छुपा या'नी
इन सूराख़ों के टुक रहने को सौ का नज़ारा जाने है
तिश्ना-ए-ख़ूँ है अपना कितना 'मीर' भी नादाँ तल्ख़ी-कश
दम-दार आब-ए-तेग़ को उस के आब-ए-गवारा जाने है

फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था : अदीम हाशमी

फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था
सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था
वो कि ख़ुशबू की तरह फैला था मेरे चार-सू
मैं उसे महसूस कर सकता था छू सकता न था
रात भर पिछली सी आहट कान में आती रही
झाँक कर देखा गली में कोई भी आया न था
मैं तिरी सूरत लिए सारे ज़माने में फिरा
सारी दुनिया में मगर कोई तिरे जैसा न था
आज मिलने की ख़ुशी में सिर्फ़ मैं जागा नहीं
तेरी आँखों से भी लगता है कि तू सोया न था
ये सभी वीरानियाँ उस के जुदा होने से थीं
आँख धुँदलाई हुई थी शहर धुँदलाया न था
सैंकड़ों तूफ़ान लफ़्ज़ों में दबे थे ज़ेर-ए-लब
एक पत्थर था ख़मोशी का कि जो हटता न था
याद कर के और भी तकलीफ़ होती थी 'अदीम'
भूल जाने के सिवा अब कोई भी चारा न था
मस्लहत ने अजनबी हम को बनाया था 'अदीम'
वर्ना कब इक दूसरे को हम ने पहचाना न था

दिल धड़कने का सबब याद आया : नासिर काज़मी

दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया
आज मुश्किल था सँभलना ऐ दोस्त
तू मुसीबत में अजब याद आया
दिन गुज़ारा था बड़ी मुश्किल से
फिर तिरा वादा-ए-शब याद आया
तेरा भूला हुआ पैमान-ए-वफ़ा
मर रहेंगे अगर अब याद आया
फिर कई लोग नज़र से गुज़रे
फिर कोई शहर-ए-तरब याद आया
हाल-ए-दिल हम भी सुनाते लेकिन
जब वो रुख़्सत हुआ तब याद आया
बैठ कर साया-ए-गुल में 'नासिर'
हम बहुत रोए वो जब याद आया

दिल में इक लहर सी उठी है अभी : नासिर काज़मी

दिल में इक लहर सी उठी है अभी
कोई ताज़ा हवा चली है अभी
कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज हैं हम भी
और ये चोट भी नई है अभी
शोर बरपा है ख़ाना-ए-दिल में
कोई दीवार सी गिरी है अभी
भरी दुनिया में जी नहीं लगता
जाने किस चीज़ की कमी है अभी
तू शरीक-ए-सुख़न नहीं है तो क्या
हम-सुख़न तेरी ख़ामुशी है अभी
याद के बे-निशाँ जज़ीरों से
तेरी आवाज़ आ रही है अभी
शहर की बे-चराग़ गलियों में
ज़िंदगी तुझ को ढूँडती है अभी
सो गए लोग उस हवेली के
एक खिड़की मगर खुली है अभी
तुम तो यारो अभी से उठ बैठे
शहर में रात जागती है अभी
वक़्त अच्छा भी आएगा 'नासिर'
ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी

हम को किस के ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही : मसरूर अनवर

हम को किस के ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही
किस ने तोड़ा दिल हमारा ये कहानी फिर सही
दिल के लुटने का सबब पूछो न सब के सामने
नाम आएगा तुम्हारा ये कहानी फिर सही
नफ़रतों के तीर खा कर दोस्तों के शहर में
हम ने किस किस को पुकारा ये कहानी फिर सही
क्या बताएँ प्यार की बाज़ी वफ़ा की राह में
कौन जीता कौन हारा ये कहानी फिर सही

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था : दाग़ देहलवी

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था
न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किस का था
वो क़त्ल कर के मुझे हर किसी से पूछते हैं
ये काम किस ने किया है ये काम किस का था
वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था
रहा न दिल में वो बेदर्द और दर्द रहा
मुक़ीम कौन हुआ है मक़ाम किस का था
न पूछ-गछ थी किसी की वहाँ न आव-भगत
तुम्हारी बज़्म में कल एहतिमाम किस का था
तमाम बज़्म जिसे सुन के रह गई मुश्ताक़
कहो वो तज़्किरा-ए-ना-तमाम किस का था
हमारे ख़त के तो पुर्ज़े किए पढ़ा भी नहीं
सुना जो तू ने ब-दिल वो पयाम किस का था
उठाई क्यूँ न क़यामत अदू के कूचे में
लिहाज़ आप को वक़्त-ए-ख़िराम किस का था
गुज़र गया वो ज़माना कहूँ तो किस से कहूँ
ख़याल दिल को मिरे सुब्ह ओ शाम किस का था
हमें तो हज़रत-ए-वाइज़ की ज़िद ने पिलवाई
यहाँ इरादा-ए-शर्ब-ए-मुदाम किस का था
अगरचे देखने वाले तिरे हज़ारों थे
तबाह-हाल बहुत ज़ेर-ए-बाम किस का था
वो कौन था कि तुम्हें जिस ने बेवफ़ा जाना
ख़याल-ए-ख़ाम ये सौदा-ए-ख़ाम किस का था
इन्हीं सिफ़ात से होता है आदमी मशहूर
जो लुत्फ़ आम वो करते ये नाम किस का था
हर इक से कहते हैं क्या 'दाग़' बेवफ़ा निकला
ये पूछे उन से कोई वो ग़ुलाम किस का था

अपनी धुन में रहता हूँ : नासिर काज़मी

अपनी धुन में रहता हूँ
मैं भी तेरे जैसा हूँ
ओ पिछली रुत के साथी
अब के बरस मैं तन्हा हूँ
तेरी गली में सारा दिन
दुख के कंकर चुनता हूँ
मुझ से आँख मिलाए कौन
मैं तेरा आईना हूँ
मेरा दिया जलाए कौन
मैं तिरा ख़ाली कमरा हूँ
तेरे सिवा मुझे पहने कौन
मैं तिरे तन का कपड़ा हूँ
तू जीवन की भरी गली
मैं जंगल का रस्ता हूँ
आती रुत मुझे रोएगी
जाती रुत का झोंका हूँ
अपनी लहर है अपना रोग
दरिया हूँ और प्यासा हूँ

ये दिल ये पागल दिल मिरा क्यूँ बुझ गया आवारगी : मोहसिन नक़वी

ये दिल ये पागल दिल मिरा क्यूँ बुझ गया आवारगी
इस दश्त में इक शहर था वो क्या हुआ आवारगी
कल शब मुझे बे-शक्ल की आवाज़ ने चौंका दिया
मैं ने कहा तू कौन है उस ने कहा आवारगी
लोगो भला इस शहर में कैसे जिएँगे हम जहाँ
हो जुर्म तन्हा सोचना लेकिन सज़ा आवारगी
ये दर्द की तन्हाइयाँ ये दश्त का वीराँ सफ़र
हम लोग तो उक्ता गए अपनी सुना आवारगी
इक अजनबी झोंके ने जब पूछा मिरे ग़म का सबब
सहरा की भीगी रेत पर मैं ने लिखा आवारगी
उस सम्त वहशी ख़्वाहिशों की ज़द में पैमान-ए-वफ़ा
उस सम्त लहरों की धमक कच्चा घड़ा आवारगी
कल रात तन्हा चाँद को देखा था मैं ने ख़्वाब में
'मोहसिन' मुझे रास आएगी शायद सदा आवारगी

किया है प्यार जिसे हम ने ज़िंदगी की तरह : क़तील शिफ़ाई

किया है प्यार जिसे हम ने ज़िंदगी की तरह
वो आश्ना भी मिला हम से अजनबी की तरह
किसे ख़बर थी बढ़ेगी कुछ और तारीकी
छुपेगा वो किसी बदली में चाँदनी की तरह
बढ़ा के प्यास मिरी उस ने हाथ छोड़ दिया
वो कर रहा था मुरव्वत भी दिल-लगी की तरह
सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपना
क़ुबूल हम ने किए जिस के ग़म ख़ुशी की तरह
कभी न सोचा था हम ने 'क़तील' उस के लिए
करेगा हम पे सितम वो भी हर किसी की तरह

तमाम उम्र तिरा इंतिज़ार हम ने किया : हफ़ीज़ होशियारपुरी

तमाम उम्र तिरा इंतिज़ार हम ने किया
इस इंतिज़ार में किस किस से प्यार हम ने किया
तलाश-ए-दोस्त को इक उम्र चाहिए ऐ दोस्त
कि एक उम्र तिरा इंतिज़ार हम ने किया
तेरे ख़याल में दिल शादमाँ रहा बरसों
तिरे हुज़ूर उसे सोगवार हम ने किया
ये तिश्नगी है के उन से क़रीब रह कर भी
'हफ़ीज़' याद उन्हें बार बार हम ने किया

रोया करेंगे आप भी पहरों इसी तरह : मोमिन ख़ाँ मोमिन

रोया करेंगे आप भी पहरों इसी तरह
अटका कहीं जो आप का दिल भी मिरी तरह
आता नहीं है वो तो किसी ढब से दाव में
बनती नहीं है मिलने की उस के कोई तरह
तश्बीह किस से दूँ कि तरह-दार की मिरे
सब से निराली वज़्अ है सब से नई तरह
मर चुक कहीं कि तू ग़म-ए-हिज्राँ से छूट जाए
कहते तो हैं भले की व-लेकिन बुरी तरह
ने ताब हिज्र में है न आराम वस्ल में
कम-बख़्त दिल को चैन नहीं है किसी तरह
लगती हैं गालियाँ भी तिरे मुँह से क्या भली
क़ुर्बान तेरे फिर मुझे कह ले उसी तरह
पामाल हम न होते फ़क़त जौर-ए-चर्ख़ से
आई हमारी जान पे आफ़त कई तरह
ने जाए वाँ बने है न बिन जाए चैन है
क्या कीजिए हमें तो है मुश्किल सभी तरह
मा'शूक़ और भी हैं बता दे जहान में
करता है कौन ज़ुल्म किसी पर तिरी तरह
हूँ जाँ-ब-लब बुतान-ए-सितमगर के हाथ से
क्या सब जहाँ में जीते हैं 'मोमिन' इसी तरह

तुझे क्या ख़बर मिरे हम-सफ़र मिरा मरहला कोई और है : दर्शन सिंह

तुझे क्या ख़बर मिरे हम-सफ़र मिरा मरहला कोई और है
मुझे मंज़िलों से गुरेज़ है मेरा रास्ता कोई और है
मेरी चाहतों को न पूछिए जो मिला तलब से सिवा मिला
मिरी दास्ताँ ही अजीब है मिरा मसअला कोई और है
ये हवस के बंदे हैं नासेहा न समझ सके मिरा मुद्दआ'
मुझे प्यार है किसी और से मिरा दिल-रुबा कोई और है
मिरा ज़ौक़-ए-सज्दा है ज़ाहिरी कि है कश्मकश मिरी ज़िंदगी
ये गुमान दिल में रहा सदा मिरा मुद्दआ' कोई और है
वो रहीम है वो करीम है वो नहीं कि ज़ुल्म करे सदा
है यक़ीं ज़माने को देख कर कि यहाँ ख़ुदा कोई और है
मैं चला कहाँ से ख़बर नहीं कि सफ़र में है मिरी ज़िंदगी
मिरी इब्तिदा कहीं और है मिरी इंतिहा कोई और है
मिरा नाम 'दर्शन'-ए-ख़स्ता-तन मिरे दिल में कोई है ज़ौ-फ़गन
मैं हूँ गुम किसी की तलाश में मुझे ढूँढता कोई और है

इतनी मुद्दत बा'द मिले हो कुछ तो दिल का हाल कहो : सय्यद शकील दस्नवी

इतनी मुद्दत बा'द मिले हो कुछ तो दिल का हाल कहो
कैसे बीते हम बिन प्यारे इतने माह-ओ-साल कहो
रूप को धोका समझो नज़र का या फिर माया-जाल कहो
प्रीत को दिल का रोग समझ लो या जी का जंजाल कहो
आँखों देखी क्या बतलाएँ हाल अजब कुछ देखा है
दुख की खेती कितनी हरी और सुख का जैसे काल कहो
एक वफ़ा को ले के तुम्हारी सारी बाज़ी खेल गए
यारों ने तो वर्ना चली थी कैसी कैसी चाल कहो
ठेस लगी है कैसी दिल पर हम से खिंचे से रहते हो
आख़िर प्यारे आया कैसे इस शीशे में बाल कहो
'सय्यद' जी क्या बीती तुम पर खोए खोए रहते हो
कुछ तो दिल की बात बताओ कुछ अपने अहवाल कहो

ये किस ने कह दिया आख़िर कि छुप-छुपा के पियो : दर्शन सिंह

ये किस ने कह दिया आख़िर कि छुप-छुपा के पियो
ये मय है मय उसे औरों को भी पिला के पियो
ग़म-ए-जहाँ को ग़म-ए-ज़ीस्त को भुला के पियो
हसीन गीत मोहब्बत के गुनगुना के पियो
छुटे न दामन-ए-ताअ'त भी वक़्त-ए-मय-नोशी
पियो तो सज्दा-ए-उल्फ़त में सर झुका के पियो
बुझे बुझे से हों अरमाँ तो क्या फ़रोग़-ए-नशात
जो सो गए हैं सितारे उन्हें जगा के पियो
ग़म-ए-हयात का दरमाँ हैं इश्क़ के आँसू
अँधेरी रात है यारो दिए जला के पियो
नसीब होगी बहर-कैफ़ मर्ज़ी-ए-साक़ी
मिले जो ज़हर भी यारो तो मुस्कुरा के पियो
मिरे ख़ुलूस पे शैख़-ए-हरम भी कह उट्ठा
जो पी रहे हो तो 'दर्शन' हरम में आ के पियो

किसी की शाम-ए-सादगी सहर का रंग पा गई : दर्शन सिंह

किसी की शाम-ए-सादगी सहर का रंग पा गई
सबा के पाँव थक गए मगर बहार आ गई
चमन की जश्न-गाह में उदासियाँ भी कम न थीं
जली जो कोई शम-ए-गुल कली का दिल बुझा गई
बुतान-ए-रंग-रंग से भरे थे बुत-कदे मगर
तेरी

मेहदी हसन की गाई हुईं मशहूर ग़ज़लें लिरिक्स : Mehdi Hasan Ghazal Lyrics

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ : अहमद फ़राज़

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
कुछ तो मिरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए आ
पहले से मरासिम न सही फिर भी कभी तो
रस्म-ओ-रह-ए-दुनिया ही निभाने के लिए आ
किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ
इक 'उम्र से हूँ लज़्ज़त-ए-गिर्या से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जाँ मुझ को रुलाने के लिए आ
अब तक दिल-ए-ख़ुश-फ़ह्‌म को तुझ से हैं उमीदें
ये आख़िरी शम'एँ भी बुझाने के लिए आ

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें : अहमद फ़राज़

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
ढूँढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती
ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें
ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो
नश्शा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें
तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा
दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँ इतने हिजाबों में मिलें
आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर
क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें
अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़'
जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है : मिर्ज़ा ग़ालिब

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है
हम हैं मुश्ताक़ और वो बे-ज़ार
या इलाही ये माजरा क्या है
मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ
काश पूछो कि मुद्दआ' क्या है
जब कि तुझ बिन नहीं कोई मौजूद
फिर ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है
ये परी-चेहरा लोग कैसे हैं
ग़म्ज़ा ओ इश्वा ओ अदा क्या है
शिकन-ए-ज़ुल्फ़-ए-अंबरीं क्यूँ है
निगह-ए-चश्म-ए-सुरमा सा क्या है
सब्ज़ा ओ गुल कहाँ से आए हैं
अब्र क्या चीज़ है हवा क्या है
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है
हाँ भला कर तिरा भला होगा
और दरवेश की सदा क्या है
जान तुम पर निसार करता हूँ
मैं नहीं जानता दुआ क्या है
मैं ने माना कि कुछ नहीं 'ग़ालिब'
मुफ़्त हाथ आए तो बुरा क्या है

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले : फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले
क़फ़स उदास है यारो सबा से कुछ तो कहो
कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले
कभी तो सुब्ह तिरे कुंज-ए-लब से हो आग़ाज़
कभी तो शब सर-ए-काकुल से मुश्क-बार चले
बड़ा है दर्द का रिश्ता ये दिल ग़रीब सही
तुम्हारे नाम पे आएँगे ग़म-गुसार चले
जो हम पे गुज़री सो गुज़री मगर शब-ए-हिज्राँ
हमारे अश्क तिरी आक़िबत सँवार चले
हुज़ूर-ए-यार हुई दफ़्तर-ए-जुनूँ की तलब
गिरह में ले के गरेबाँ का तार तार चले
मक़ाम 'फ़ैज़' कोई राह में जचा ही नहीं
जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की : परवीन शाकिर

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
उस ने ख़ुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की
कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उस ने
बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की
वो कहीं भी गया लौटा तो मिरे पास आया
बस यही बात है अच्छी मिरे हरजाई की
तेरा पहलू तिरे दिल की तरह आबाद रहे
तुझ पे गुज़रे न क़यामत शब-ए-तन्हाई की
उस ने जलती हुई पेशानी पे जब हाथ रखा
रूह तक आ गई तासीर मसीहाई की
अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है
जाग उठती हैं अजब ख़्वाहिशें अंगड़ाई की

मोहब्बत करने वाले कम न होंगे : हफ़ीज़ होशियारपुरी

मोहब्बत करने वाले कम न होंगे
तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे
मैं अक्सर सोचता हूँ फूल कब तक
शरीक-ए-गिर्या-ए-शबनम न होंगे
ज़रा देर-आश्ना चश्म-ए-करम है
सितम ही इश्क़ में पैहम न होंगे
दिलों की उलझनें बढ़ती रहेंगी
अगर कुछ मशवरे बाहम न होंगे
ज़माने भर के ग़म या इक तिरा ग़म
ये ग़म होगा तो कितने ग़म न होंगे
कहूँ बेदर्द क्यूँ अहल-ए-जहाँ को
वो मेरे हाल से महरम न होंगे
हमारे दिल में सैल-ए-गिर्या होगा
अगर बा-दीदा-ए-पुर-नम न होंगे
अगर तू इत्तिफ़ाक़न मिल भी जाए
तिरी फ़ुर्क़त के सदमे कम न होंगे
'हफ़ीज़' उन से मैं जितना बद-गुमाँ हूँ
वो मुझ से उस क़दर बरहम न होंगे

बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी : बहादुर शाह ज़फ़र

बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी
जैसी अब है तिरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी
ले गया छीन के कौन आज तिरा सब्र ओ क़रार
बे-क़रारी तुझे ऐ दिल कभी ऐसी तो न थी
उस की आँखों ने ख़ुदा जाने किया क्या जादू
कि तबीअ'त मिरी माइल कभी ऐसी तो न थी
अक्स-ए-रुख़्सार ने किस के है तुझे चमकाया
ताब तुझ में मह-ए-कामिल कभी ऐसी तो न थी
अब की जो राह-ए-मोहब्बत में उठाई तकलीफ़
सख़्त होती हमें मंज़िल कभी ऐसी तो न थी
पा-ए-कूबाँ कोई ज़िंदाँ में नया है मजनूँ
आती आवाज़-ए-सलासिल कभी ऐसी तो न थी
निगह-ए-यार को अब क्यूँ है तग़ाफ़ुल ऐ दिल
वो तिरे हाल से ग़ाफ़िल कभी ऐसी तो न थी
चश्म-ए-क़ातिल मिरी दुश्मन थी हमेशा लेकिन
जैसी अब हो गई क़ातिल कभी ऐसी तो न थी
क्या सबब तू जो बिगड़ता है 'ज़फ़र' से हर बार
ख़ू तिरी हूर-शमाइल कभी ऐसी तो न थी

फिर मुझे दीदा-ए-तर याद आया : मिर्ज़ा ग़ालिब

फिर मुझे दीदा-ए-तर याद आया
दिल जिगर तिश्ना-ए-फ़रयाद आया
दम लिया था न क़यामत ने हनूज़
फिर तिरा वक़्त-ए-सफ़र याद आया
सादगी-हा-ए-तमन्ना या'नी
फिर वो नैरंग-ए-नज़र याद आया
उज़्र-ए-वामांदगी ऐ हसरत-ए-दिल
नाला करता था जिगर याद आया
ज़िंदगी यूँ भी गुज़र ही जाती
क्यूँ तिरा राहगुज़र याद आया
क्या ही रिज़वाँ से लड़ाई होगी
घर तिरा ख़ुल्द में गर याद आया
आह वो जुरअत-ए-फ़रियाद कहाँ
दिल से तंग आ के जिगर याद आया
फिर तिरे कूचे को जाता है ख़याल
दिल-ए-गुम-गश्ता मगर याद आया
कोई वीरानी सी वीरानी है
दश्त को देख के घर याद आया
मैं ने मजनूँ पे लड़कपन में 'असद'
संग उठाया था कि सर याद आया
वस्ल में हिज्र का डर याद आया
ऐन जन्नत में सक़र याद आया

शो'ला था जल-बुझा हूँ हवाएँ मुझे न दो : अहमद फ़राज़

शो'ला था जल-बुझा हूँ हवाएँ मुझे न दो
मैं कब का जा चुका हूँ सदाएँ मुझे न दो
जो ज़हर पी चुका हूँ तुम्हीं ने मुझे दिया
अब तुम तो ज़िंदगी की दुआएँ मुझे न दो
ये भी बड़ा करम है सलामत है जिस्म अभी
ऐ ख़ुसरवान-ए-शहर क़बाएँ मुझे न दो
ऐसा न हो कभी कि पलट कर न आ सकूँ
हर बार दूर जा के सदाएँ मुझे न दो
कब मुझ को ए'तिराफ़-ए-मोहब्बत न था 'फ़राज़'
कब मैं ने ये कहा है सज़ाएँ मुझे न दो

अल्लाह अगर तौफ़ीक़ न दे इंसान के बस का काम नहीं : जिगर मुरादाबादी

अल्लाह अगर तौफ़ीक़ न दे इंसान के बस का काम नहीं
फ़ैज़ान-ए-मोहब्बत आम सही इरफ़ान-ए-मोहब्बत आम नहीं
ये तू ने कहा क्या ऐ नादाँ फ़य्याज़ी-ए-क़ुदरत आम नहीं
तू फ़िक्र ओ नज़र तो पैदा कर क्या चीज़ है जो इनआम नहीं
या-रब ये मक़ाम-ए-इश्क़ है क्या गो दीदा-ओ-दिल नाकाम नहीं
तस्कीन है और तस्कीन नहीं आराम है और आराम नहीं
क्यूँ मस्त-ए-शराब-ए-ऐश-ओ-तरब तकलीफ़-ए-तवज्जोह फ़रमाएँ
आवाज़-ए-शिकस्त-ए-दिल ही तो है आवाज़-ए-शिकस्त-ए-जाम नहीं
आना है जो बज़्म-ए-जानाँ में पिंदार-ए-ख़ुदी को तोड़ के आ
ऐ होश-ओ-ख़िरद के दीवाने याँ होश-ओ-ख़िरद का काम नहीं
ज़ाहिद ने कुछ इस अंदाज़ से पी साक़ी की निगाहें पड़ने लगीं
मय-कश यही अब तक समझे थे शाइस्ता दौर-ए-जाम नहीं
इश्क़ और गवारा ख़ुद कर ले बे-शर्त शिकस्त-ए-फ़ाश अपनी
दिल की भी कुछ उन के साज़िश है तन्हा ये नज़र का काम नहीं
सब जिस को असीरी कहते हैं वो तो है अमीरी ही लेकिन
वो कौन सी आज़ादी है यहाँ जो आप ख़ुद अपना दाम नहीं

जगजीत सिंह की गाई हुईं मशहूर ग़ज़लें लिरिक्स : Jagjit Singh Ghazal Lyrics

कुछ लोकप्रिय गजलें जिन्हें भारत ही नहीं दुनियाभर के गजल सुननेवालों के दिल पर राज किया जगजीत सिंह जी ने अपनी आवाज दी जो आज भी जीवित है ।

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले : मिर्ज़ा ग़ालिब

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
डरे क्यूँ मेरा क़ातिल क्या रहेगा उस की गर्दन पर
वो ख़ूँ जो चश्म-ए-तर से उम्र भर यूँ दम-ब-दम निकले
निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन
बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले
भरम खुल जाए ज़ालिम तेरे क़ामत की दराज़ी का
अगर इस तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-ख़म का पेच-ओ-ख़म निकले
मगर लिखवाए कोई उस को ख़त तो हम से लिखवाए
हुई सुब्ह और घर से कान पर रख कर क़लम निकले
हुई इस दौर में मंसूब मुझ से बादा-आशामी
फिर आया वो ज़माना जो जहाँ में जाम-ए-जम निकले
हुई जिन से तवक़्क़ो' ख़स्तगी की दाद पाने की
वो हम से भी ज़ियादा ख़स्ता-ए-तेग़-ए-सितम निकले
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले
कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइ'ज़
पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक : मिर्ज़ा ग़ालिब

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक
दाम-ए-हर-मौज में है हल्क़ा-ए-सद-काम-ए-नहंग
देखें क्या गुज़रे है क़तरे पे गुहर होते तक
आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होते तक
हम ने माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन
ख़ाक हो जाएँगे हम तुम को ख़बर होते तक
परतव-ए-ख़ुर से है शबनम को फ़ना की ता'लीम
मैं भी हूँ एक इनायत की नज़र होते तक
यक नज़र बेश नहीं फ़ुर्सत-ए-हस्ती ग़ाफ़िल
गर्मी-ए-बज़्म है इक रक़्स-ए-शरर होते तक
ग़म-ए-हस्ती का 'असद' किस से हो जुज़ मर्ग इलाज
शम्अ हर रंग में जलती है सहर होते तक
ता-क़यामत शब-ए-फ़ुर्क़त में गुज़र जाएगी उम्र
सात दिन हम पे भी भारी हैं सहर होते तक

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो : कैफ़ी आज़मी

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो
क्या ग़म है जिस को छुपा रहे हो
आँखों में नमी हँसी लबों पर
क्या हाल है क्या दिखा रहे हो
बन जाएँगे ज़हर पीते पीते
ये अश्क जो पीते जा रहे हो
जिन ज़ख़्मों को वक़्त भर चला है
तुम क्यूँ उन्हें छेड़े जा रहे हो
रेखाओं का खेल है मुक़द्दर
रेखाओं से मात खा रहे हो

कोई फ़रियाद तिरे दिल में दबी हो जैसे : फ़ैज़ अनवर

कोई फ़रियाद तिरे दिल में दबी हो जैसे
तू ने आँखों से कोई बात कही हो जैसे
जागते जागते इक उम्र कटी हो जैसे
जान बाक़ी है मगर साँस रुकी हो जैसे
हर मुलाक़ात पे महसूस यही होता है
मुझ से कुछ तेरी नज़र पूछ रही हो जैसे
राह चलते हुए अक्सर ये गुमाँ होता है
वो नज़र छुप के मुझे देख रही हो जैसे
एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफ़र
ज़िंदगी तेज़ बहुत तेज़ चली हो जैसे
इस तरह पहरों तुझे सोचता रहता हूँ मैं
मेरी हर साँस तिरे नाम लिखी हो जैसे

झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं : कैफ़ी आज़मी

झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं
दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं
तू अपने दिल की जवाँ धड़कनों को गिन के बता
मिरी तरह तिरा दिल बे-क़रार है कि नहीं
वो पल कि जिस में मोहब्बत जवान होती है
उस एक पल का तुझे इंतिज़ार है कि नहीं
तिरी उमीद पे ठुकरा रहा हूँ दुनिया को
तुझे भी अपने पे ये ए'तिबार है कि नहीं

होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है : निदा फ़ाज़ली

होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
उन से नज़रें क्या मिलीं रौशन फ़ज़ाएँ हो गईं
आज जाना प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है
बिखरी ज़ुल्फ़ों ने सिखाई मौसमों को शाइ'री
झुकती आँखों ने बताया मय-कशी क्या चीज़ है
हम लबों से कह न पाए उन से हाल-ए-दिल कभी
और वो समझे नहीं ये ख़ामोशी क्या चीज़ है

सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता : अमीर मीनाई

सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता
निकलता आ रहा है आफ़्ताब आहिस्ता आहिस्ता
जवाँ होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा
हया यक-लख़्त आई और शबाब आहिस्ता आहिस्ता
शब-ए-फ़ुर्क़त का जागा हूँ फ़रिश्तो अब तो सोने दो
कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता आहिस्ता
सवाल-ए-वस्ल पर उन को अदू का ख़ौफ़ है इतना
दबे होंटों से देते हैं जवाब आहिस्ता आहिस्ता
वो बेदर्दी से सर काटें 'अमीर' और मैं कहूँ उन से
हुज़ूर आहिस्ता आहिस्ता जनाब आहिस्ता आहिस्ता

बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता : निदा फ़ाज़ली

बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता
जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता
सब कुछ तो है क्या ढूँढती रहती हैं निगाहें
क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता
वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता
मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा
जाते हैं जिधर सब मैं उधर क्यूँ नहीं जाता
वो ख़्वाब जो बरसों से न चेहरा न बदन है
वो ख़्वाब हवाओं में बिखर क्यूँ नहीं जाता

मुझ से बिछड़ के ख़ुश रहते हो : बशीर बद्र

मुझ से बिछड़ के ख़ुश रहते हो
मेरी तरह तुम भी झूटे हो
इक दीवार पे चाँद टिका था
मैं ये समझा तुम बैठे हो
उजले उजले फूल खिले थे
बिल्कुल जैसे तुम हँसते हो
मुझ को शाम बता देती है
तुम कैसे कपड़े पहने हो
दिल का हाल पढ़ा चेहरे से
साहिल से लहरें गिनते हो
तुम तन्हा दुनिया से लड़ोगे
बच्चों सी बातें करते हो

तेरे आने की जब ख़बर महके : नवाज़ देवबंदी

तेरे आने की जब ख़बर महके
तेरी ख़ुशबू से सारा घर महके
शाम महके तिरे तसव्वुर से
शाम के बा'द फिर सहर महके
रात भर सोचता रहा तुझ को
ज़ेहन-ओ-दिल मेरे रात भर महके
याद आए तो दिल मुनव्वर हो
दीद हो जाए तो नज़र महके
वो घड़ी-दो-घड़ी जहाँ बैठे
वो ज़मीं महके वो शजर महके

बेगम अख्तर की ग़ज़लें लिरिक्स : Begam Akhtar (Sung) Ghazals Lyrics in Hindi

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता : मिर्ज़ा ग़ालिब

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
तिरे वा'दे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए'तिबार होता
तिरी नाज़ुकी से जाना कि बँधा था अहद बोदा
कभी तू न तोड़ सकता अगर उस्तुवार होता
कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता
ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता
रग-ए-संग से टपकता वो लहू कि फिर न थमता
जिसे ग़म समझ रहे हो ये अगर शरार होता
ग़म अगरचे जाँ-गुसिल है प कहाँ बचें कि दिल है
ग़म-ए-इश्क़ गर न होता ग़म-ए-रोज़गार होता
कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता
हुए मर के हम जो रुस्वा हुए क्यूँ न ग़र्क़-ए-दरिया
न कभी जनाज़ा उठता न कहीं मज़ार होता
उसे कौन देख सकता कि यगाना है वो यकता
जो दुई की बू भी होती तो कहीं दो-चार होता
ये मसाईल-ए-तसव्वुफ़ ये तिरा बयान 'ग़ालिब'
तुझे हम वली समझते जो न बादा-ख़्वार होता

वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो : मोमिन ख़ाँ मोमिन

वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो
वही या'नी वा'दा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो
वो जो लुत्फ़ मुझ पे थे बेशतर वो करम कि था मिरे हाल पर
मुझे सब है याद ज़रा ज़रा तुम्हें याद हो कि न याद हो
वो नए गिले वो शिकायतें वो मज़े मज़े की हिकायतें
वो हर एक बात पे रूठना तुम्हें याद हो कि न याद हो
कभी बैठे सब में जो रू-ब-रू तो इशारतों ही से गुफ़्तुगू
वो बयान शौक़ का बरमला तुम्हें याद हो कि न याद हो
हुए इत्तिफ़ाक़ से गर बहम तो वफ़ा जताने को दम-ब-दम
गिला-ए-मलामत-ए-अक़रिबा तुम्हें याद हो कि न याद हो
कोई बात ऐसी अगर हुई कि तुम्हारे जी को बुरी लगी
तो बयाँ से पहले ही भूलना तुम्हें याद हो कि न याद हो
कभी हम में तुम में भी चाह थी कभी हम से तुम से भी राह थी
कभी हम भी तुम भी थे आश्ना तुम्हें याद हो कि न याद हो
सुनो ज़िक्र है कई साल का कि किया इक आप ने वा'दा था
सो निबाहने का तो ज़िक्र क्या तुम्हें याद हो कि न याद हो
कहा मैं ने बात वो कोठे की मिरे दिल से साफ़ उतर गई
तो कहा कि जाने मिरी बला तुम्हें याद हो कि न याद हो
वो बिगड़ना वस्ल की रात का वो न मानना किसी बात का
वो नहीं नहीं की हर आन अदा तुम्हें याद हो कि न याद हो
जिसे आप गिनते थे आश्ना जिसे आप कहते थे बा-वफ़ा
मैं वही हूँ 'मोमिन'-ए-मुब्तला तुम्हें याद हो कि न याद हो

मिरे हम-नफ़स मिरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे : शकील बदायूनी

मिरे हम-नफ़स मिरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे
मैं हूँ दर्द-ए-'इश्क़ से जाँ-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दु'आ न दे
मिरे दाग़-ए-दिल से है रौशनी इसी रौशनी से है ज़िंदगी
मुझे डर है ऐ मिरे चारा-गर ये चराग़ तू ही बुझा न दे
मुझे छोड़ दे मिरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर
ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मिरा दर्द और बढ़ा न दे
मिरा 'अज़्म इतना बुलंद है कि पराए शो'लों का डर नहीं
मुझे ख़ौफ़ आतिश-ए-गुल से है ये कहीं चमन को जला न दे
वो उठे हैं ले के ख़ुम-ओ-सुबू अरे ओ 'शकील' कहाँ है तू
तिरा जाम लेने को बज़्म में कोई और हाथ बढ़ा न दे

उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया : मीर तक़ी मीर

उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया
देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया
अहद-ए-जवानी रो रो काटा पीरी में लीं आँखें मूँद
या'नी रात बहुत थे जागे सुब्ह हुई आराम किया
हर्फ़ नहीं जाँ-बख़्शी में उस की ख़ूबी अपनी क़िस्मत की
हम से जो पहले कह भेजा सो मरने का पैग़ाम किया
नाहक़ हम मजबूरों पर ये तोहमत है मुख़्तारी की
चाहते हैं सो आप करें हैं हम को अबस बदनाम किया
सारे रिंद औबाश जहाँ के तुझ से सुजूद में रहते हैं
बाँके टेढ़े तिरछे तीखे सब का तुझ को इमाम किया
सरज़द हम से बे-अदबी तो वहशत में भी कम ही हुई
कोसों उस की ओर गए पर सज्दा हर हर गाम किया
किस का काबा कैसा क़िबला कौन हरम है क्या एहराम
कूचे के उस के बाशिंदों ने सब को यहीं से सलाम किया
शैख़ जो है मस्जिद में नंगा रात को था मय-ख़ाने में
जुब्बा ख़िर्क़ा कुर्ता टोपी मस्ती में इनआ'म किया
काश अब बुर्क़ा मुँह से उठा दे वर्ना फिर क्या हासिल है
आँख मुँदे पर उन ने गो दीदार को अपने आम किया
याँ के सपीद ओ सियह में हम को दख़्ल जो है सो इतना है
रात को रो रो सुब्ह किया या दिन को जूँ तूँ शाम किया
सुब्ह चमन में उस को कहीं तकलीफ़-ए-हवा ले आई थी
रुख़ से गुल को मोल लिया क़ामत से सर्व ग़ुलाम किया
साअद-ए-सीमीं दोनों उस के हाथ में ला कर छोड़ दिए
भूले उस के क़ौल-ओ-क़सम पर हाए ख़याल-ए-ख़ाम किया
काम हुए हैं सारे ज़ाएअ' हर साअ'त की समाजत से
इस्तिग़्ना की चौगुनी उन ने जूँ जूँ मैं इबराम किया
ऐसे आहु-ए-रम-ख़ुर्दा की वहशत खोनी मुश्किल थी
सेहर किया ए'जाज़ किया जिन लोगों ने तुझ को राम किया
'मीर' के दीन-ओ-मज़हब को अब पूछते क्या हो उन ने तो
क़श्क़ा खींचा दैर में बैठा कब का तर्क इस्लाम किया

लाई हयात आए क़ज़ा ले चली चले : शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

लाई हयात आए क़ज़ा ले चली चले
अपनी ख़ुशी न आए न अपनी ख़ुशी चले
हो उम्र-ए-ख़िज़्र भी तो हो मालूम वक़्त-ए-मर्ग
हम क्या रहे यहाँ अभी आए अभी चले
हम से भी इस बिसात पे कम होंगे बद-क़िमार
जो चाल हम चले सो निहायत बुरी चले
बेहतर तो है यही कि न दुनिया से दिल लगे
पर क्या करें जो काम न बे-दिल-लगी चले
लैला का नाक़ा दश्त में तासीर-ए-इश्क़ से
सुन कर फ़ुग़ान-ए-क़ैस बजा-ए-हुदी चले
नाज़ाँ न हो ख़िरद पे जो होना है हो वही
दानिश तिरी न कुछ मिरी दानिश-वरी चले
दुनिया ने किस का राह-ए-फ़ना में दिया है साथ
तुम भी चले चलो यूँही जब तक चली चले
जाते हवा-ए-शौक़ में हैं इस चमन से 'ज़ौक़'
अपनी बला से बाद-ए-सबा अब कभी चले

कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया : सुदर्शन फ़ाकिर

कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया
और कुछ तल्ख़ी-ए-हालात ने दिल तोड़ दिया
हम तो समझे थे के बरसात में बरसेगी शराब
आई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया
दिल तो रोता रहे ओर आँख से आँसू न बहे
इश्क़ की ऐसी रिवायात ने दिल तोड़ दिया
वो मिरे हैं मुझे मिल जाएँगे आ जाएँगे
ऐसे बेकार ख़यालात ने दिल तोड़ दिया
आप को प्यार है मुझ से कि नहीं है मुझ से
जाने क्यूँ ऐसे सवालात ने दिल तोड़ दिया

इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े : कैफ़ी आज़मी

इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े
जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े
इक तुम कि तुम को फ़िक्र-ए-नशेब-ओ-फ़राज़ है
इक हम कि चल पड़े तो बहर-हाल चल पड़े
साक़ी सभी को है ग़म-ए-तिश्ना-लबी मगर
मय है उसी की नाम पे जिस के उबल पड़े
मुद्दत के बा'द उस ने जो की लुत्फ़ की निगाह
जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े

दिल से तिरी निगाह जिगर तक उतर गई : मिर्ज़ा ग़ालिब

दिल से तिरी निगाह जिगर तक उतर गई
दोनों को इक अदा में रज़ा-मंद कर गई
शक़ हो गया है सीना ख़ुशा लज़्ज़त-ए-फ़राग़
तकलीफ़-ए-पर्दा-दारी-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर गई
वो बादा-ए-शबाना की सरमस्तियाँ कहाँ
उठिए बस अब कि लज़्ज़त-ए-ख़्वाब-ए-सहर गई
उड़ती फिरे है ख़ाक मिरी कू-ए-यार में
बारे अब ऐ हवा हवस-ए-बाल-ओ-पर गई
देखो तो दिल-फ़रेबी-ए-अंदाज़-ए-नक़्श-ए-पा
मौज-ए-ख़िराम-ए-यार भी क्या गुल कतर गई
हर बुल-हवस ने हुस्न-परस्ती शिआ'र की
अब आबरू-ए-शेवा-ए-अहल-ए-नज़र गई
नज़्ज़ारे ने भी काम किया वाँ नक़ाब का
मस्ती से हर निगह तिरे रुख़ पर बिखर गई
फ़र्दा ओ दी का तफ़रक़ा यक बार मिट गया
कल तुम गए कि हम पे क़यामत गुज़र गई
मारा ज़माने ने असदुल्लाह ख़ाँ तुम्हें
वो वलवले कहाँ वो जवानी किधर गई

दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे : बहज़ाद लखनवी

दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे
वर्ना कहीं तक़दीर तमाशा न बना दे
ऐ देखने वालो मुझे हँस हँस के न देखो
तुम को भी मोहब्बत कहीं मुझ सा न बना दे
मैं ढूँढ रहा हूँ मिरी वो शम्अ कहाँ है
जो बज़्म की हर चीज़ को परवाना बना दे
आख़िर कोई सूरत भी तो हो ख़ाना-ए-दिल की
काबा नहीं बनता है तो बुत-ख़ाना बना दे
'बहज़ाद' हर इक गाम पे इक सज्दा-ए-मस्ती
हर ज़र्रे को संग-ए-दर-ए-जानाना बना दे

तबी'अत इन दिनों बेगाना-ए-ग़म होती जाती है : जिगर मुरादाबादी

तबी'अत इन दिनों बेगाना-ए-ग़म होती जाती है
मिरे हिस्से की गोया हर ख़ुशी कम होती जाती है
सहर होने को है बेदार शबनम होती जाती है
ख़ुशी मिंजुमला-ओ-अस्बाब-ए-मातम होती जाती है
क़यामत क्या ये ऐ हुस्न-ए-दो-'आलम होती जाती है
कि महफ़िल तो वही है दिल-कशी कम होती जाती है
वही मय-ख़ाना-ओ-सहबा वही साग़र वही शीशा
मगर आवाज़-ए-नोशा-नोश मद्धम होती जाती है
वही हैं शाहिद-ओ-साक़ी मगर दिल बुझता जाता है
वही है शम' लेकिन रौशनी कम होती जाती है
वही शोरिश है लेकिन जैसे मौज-ए-तह-नशीं कोई
वही दिल है मगर आवाज़ मद्धम होती जाती है
वही है ज़िंदगी लेकिन 'जिगर' ये हाल है अपना
कि जैसे ज़िंदगी से ज़िंदगी कम होती जाती है

मोहम्मद रफी की फ़िल्मी ग़ज़लें : Mohammed Rafi Ghazals Lyrics in Hindi


मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ में गाई गई फ़िल्मी ग़ज़लों का यह संग्रह उनकी मधुर और भावपूर्ण गायकी की खूबसूरत झलक प्रस्तुत करता है। इस पोस्ट में साहिर लुधियानवी, मिर्ज़ा ग़ालिब सहित अनेक प्रसिद्ध शायरों की ग़ज़लें शामिल हैं। प्रेम, विरह, दर्द और ज़िंदगी के अलग-अलग रंगों को समेटे ये ग़ज़लें आज भी श्रोताओं के बीच लोकप्रिय हैं। यहाँ आप मोहम्मद रफ़ी की मशहूर फ़िल्मी ग़ज़लों के बोल हिंदी में पढ़ सकते हैं।


इस पोस्ट में

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया : साहिर लुधियानवी

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया
बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया
हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया
किस लिए जीते हैं हम किस के लिए जीते हैं
बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया
कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त
सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे : मिर्ज़ा ग़ालिब

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे
इक खेल है औरंग-ए-सुलैमाँ मिरे नज़दीक
इक बात है एजाज़-ए-मसीहा मिरे आगे
जुज़ नाम नहीं सूरत-ए-आलम मुझे मंज़ूर
जुज़ वहम नहीं हस्ती-ए-अशिया मिरे आगे
होता है निहाँ गर्द में सहरा मिरे होते
घिसता है जबीं ख़ाक पे दरिया मिरे आगे
मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तिरे पीछे
तू देख कि क्या रंग है तेरा मिरे आगे
सच कहते हो ख़ुद-बीन ओ ख़ुद-आरा हूँ न क्यूँ हूँ
बैठा है बुत-ए-आइना-सीमा मिरे आगे
फिर देखिए अंदाज़-ए-गुल-अफ़्शानी-ए-गुफ़्तार
रख दे कोई पैमाना-ए-सहबा मिरे आगे
नफ़रत का गुमाँ गुज़रे है मैं रश्क से गुज़रा
क्यूँकर कहूँ लो नाम न उन का मिरे आगे
ईमाँ मुझे रोके है जो खींचे है मुझे कुफ़्र
काबा मिरे पीछे है कलीसा मिरे आगे
आशिक़ हूँ प माशूक़-फ़रेबी है मिरा काम
मजनूँ को बुरा कहती है लैला मिरे आगे
ख़ुश होते हैं पर वस्ल में यूँ मर नहीं जाते
आई शब-ए-हिज्राँ की तमन्ना मिरे आगे
है मौजज़न इक क़ुल्ज़ुम-ए-ख़ूँ काश यही हो
आता है अभी देखिए क्या क्या मिरे आगे
गो हाथ को जुम्बिश नहीं आँखों में तो दम है
रहने दो अभी साग़र-ओ-मीना मिरे आगे
हम-पेशा ओ हम-मशरब ओ हमराज़ है मेरा
'ग़ालिब' को बुरा क्यूँ कहो अच्छा मिरे आगे

न किसी की आँख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ : मुज़्तर ख़ैराबादी

न किसी की आँख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ
किसी काम में जो न आ सके मैं वो एक मुश्त-ए-ग़ुबार हूँ
न दवा-ए-दर्द-ए-जिगर हूँ मैं न किसी की मीठी नज़र हूँ मैं
न इधर हूँ मैं न उधर हूँ मैं न शकेब हूँ न क़रार हूँ
मिरा वक़्त मुझ से बिछड़ गया मिरा रंग-रूप बिगड़ गया
जो ख़िज़ाँ से बाग़ उजड़ गया मैं उसी की फ़स्ल-ए-बहार हूँ
पए फ़ातिहा कोई आए क्यूँ कोई चार फूल चढ़ाए क्यूँ
कोई आ के शम' जलाए क्यूँ मैं वो बेकसी का मज़ार हूँ
न मैं लाग हूँ न लगाव हूँ न सुहाग हूँ न सुभाव हूँ
जो बिगड़ गया वो बनाव हूँ जो नहीं रहा वो सिंगार हूँ
मैं नहीं हूँ नग़्मा-ए-जाँ-फ़ज़ा मुझे सुन के कोई करेगा क्या
मैं बड़े बिरोग की हूँ सदा मैं बड़े दुखी की पुकार हूँ
न मैं 'मुज़्तर' उन का हबीब हूँ न मैं 'मुज़्तर' उन का रक़ीब हूँ
जो बिगड़ गया वो नसीब हूँ जो उजड़ गया वो दयार हूँ

मुद्दत हुई है यार को मेहमाँ किए हुए : मिर्ज़ा ग़ालिब

मुद्दत हुई है यार को मेहमाँ किए हुए
जोश-ए-क़दह से बज़्म चराग़ाँ किए हुए
करता हूँ जम्अ' फिर जिगर-ए-लख़्त-लख़्त को
अर्सा हुआ है दावत-ए-मिज़्गाँ किए हुए
फिर वज़'-ए-एहतियात से रुकने लगा है दम
बरसों हुए हैं चाक गरेबाँ किए हुए
फिर गर्म-नाला-हा-ए-शरर-बार है नफ़स
मुद्दत हुई है सैर-ए-चराग़ाँ किए हुए
फिर पुर्सिश-ए-जराहत-ए-दिल को चला है इश्क़
सामान-ए-सद-हज़ार नमक-दाँ किए हुए
फिर भर रहा हूँ ख़ामा-ए-मिज़्गाँ ब-ख़ून-ए-दिल
साज़-ए-चमन तराज़ी-ए-दामाँ किए हुए
बाहम-दिगर हुए हैं दिल ओ दीदा फिर रक़ीब
नज़्ज़ारा ओ ख़याल का सामाँ किए हुए
दिल फिर तवाफ़-ए-कू-ए-मलामत को जाए है
पिंदार का सनम-कदा वीराँ किए हुए
फिर शौक़ कर रहा है ख़रीदार की तलब
अर्ज़-ए-मता-ए-अक़्ल-ओ-दिल-ओ-जाँ किए हुए
दौड़े है फिर हर एक गुल-ओ-लाला पर ख़याल
सद-गुलसिताँ निगाह का सामाँ किए हुए
फिर चाहता हूँ नामा-ए-दिलदार खोलना
जाँ नज़्र-ए-दिल-फ़रेबी-ए-उनवाँ किए हुए
माँगे है फिर किसी को लब-ए-बाम पर हवस
ज़ुल्फ़-ए-सियाह रुख़ पे परेशाँ किए हुए
चाहे है फिर किसी को मुक़ाबिल में आरज़ू
सुरमे से तेज़ दश्ना-ए-मिज़्गाँ किए हुए
इक नौ-बहार-ए-नाज़ को ताके है फिर निगाह
चेहरा फ़रोग़-ए-मय से गुलिस्ताँ किए हुए
फिर जी में है कि दर पे किसी के पड़े रहें
सर ज़ेर-बार-ए-मिन्नत-ए-दरबाँ किए हुए
जी ढूँडता है फिर वही फ़ुर्सत कि रात दिन
बैठे रहें तसव्वुर-ए-जानाँ किए हुए
'ग़ालिब' हमें न छेड़ कि फिर जोश-ए-अश्क से
बैठे हैं हम तहय्या-ए-तूफ़ाँ किए हुए

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया : साहिर लुधियानवी

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया
हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया
बर्बादियों का सोग मनाना फ़ुज़ूल था
बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया
जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया
जो खो गया मैं उस को भुलाता चला गया
ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया

बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना : मिर्ज़ा ग़ालिब

बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना
आदमी को भी मुयस्सर नहीं इंसाँ होना
गिर्या चाहे है ख़राबी मिरे काशाने की
दर ओ दीवार से टपके है बयाबाँ होना
वाए-दीवानगी-ए-शौक़ कि हर दम मुझ को
आप जाना उधर और आप ही हैराँ होना
जल्वा अज़-बस-कि तक़ाज़ा-ए-निगह करता है
जौहर-ए-आइना भी चाहे है मिज़्गाँ होना
इशरत-ए-क़त्ल-गह-ए-अहल-ए-तमन्ना मत पूछ
ईद-ए-नज़्ज़ारा है शमशीर का उर्यां होना
ले गए ख़ाक में हम दाग़-ए-तमन्ना-ए-नशात
तू हो और आप ब-सद-रंग-ए-गुलिस्ताँ होना
इशरत-ए-पारा-ए-दिल ज़ख़्म-ए-तमन्ना खाना
लज़्ज़त-ए-रीश-ए-जिगर ग़र्क़-ए-नमक-दाँ होना
की मिरे क़त्ल के बा'द उस ने जफ़ा से तौबा
हाए उस ज़ूद-पशेमाँ का पशेमाँ होना
हैफ़ उस चार गिरह कपड़े की क़िस्मत 'ग़ालिब'
जिस की क़िस्मत में हो आशिक़ का गरेबाँ होना

नुक्ता-चीं है ग़म-ए-दिल उस को सुनाए न बने : मिर्ज़ा ग़ालिब

नुक्ता-चीं है ग़म-ए-दिल उस को सुनाए न बने
क्या बने बात जहाँ बात बनाए न बने
मैं बुलाता तो हूँ उस को मगर ऐ जज़्बा-ए-दिल
उस पे बन जाए कुछ ऐसी कि बिन आए न बने
खेल समझा है कहीं छोड़ न दे भूल न जाए
काश यूँ भी हो कि बिन मेरे सताए न बने
ग़ैर फिरता है लिए यूँ तिरे ख़त को कि अगर
कोई पूछे कि ये क्या है तो छुपाए न बने
इस नज़ाकत का बुरा हो वो भले हैं तो क्या
हाथ आवें तो उन्हें हाथ लगाए न बने
कह सके कौन कि ये जल्वागरी किस की है
पर्दा छोड़ा है वो उस ने कि उठाए न बने
मौत की राह न देखूँ कि बिन आए न रहे
तुम को चाहूँ कि न आओ तो बुलाए न बने
बोझ वो सर से गिरा है कि उठाए न उठे
काम वो आन पड़ा है कि बनाए न बने
इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब'
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने

ग़ज़ब किया तिरे वा'दे पे ए'तिबार किया : दाग़ देहलवी

ग़ज़ब किया तिरे वा'दे पे ए'तिबार किया
तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया
किसी तरह जो न उस बुत ने ए'तिबार किया
मिरी वफ़ा ने मुझे ख़ूब शर्मसार किया
हँसा हँसा के शब-ए-वस्ल अश्क-बार किया
तसल्लियाँ मुझे दे दे के बे-क़रार किया
ये किस ने जल्वा हमारे सर-ए-मज़ार किया
कि दिल से शोर उठा हाए बे-क़रार किया
सुना है तेग़ को क़ातिल ने आब-दार किया
अगर ये सच है तो बे-शुब्ह हम पे वार किया
न आए राह पे वो इज्ज़ बे-शुमार किया
शब-ए-विसाल भी मैं ने तो इंतिज़ार किया
तुझे तो वादा-ए-दीदार हम से करना था
ये क्या किया कि जहाँ को उमीद-वार किया
ये दिल को ताब कहाँ है कि हो मआल-अंदेश
उन्हों ने वा'दा किया इस ने ए'तिबार किया
कहाँ का सब्र कि दम पर है बन गई ज़ालिम
ब तंग आए तो हाल-ए-दिल आश्कार किया
तड़प फिर ऐ दिल-ए-नादाँ कि ग़ैर कहते हैं
अख़ीर कुछ न बनी सब्र इख़्तियार किया
मिले जो यार की शोख़ी से उस की बेचैनी
तमाम रात दिल-ए-मुज़्तरिब को प्यार किया
भुला भुला के जताया है उन को राज़-ए-निहाँ
छुपा छुपा के मोहब्बत को आश्कार किया
न उस के दिल से मिटाया कि साफ़ हो जाता
सबा ने ख़ाक परेशाँ मिरा ग़ुबार किया
हम ऐसे महव-ए-नज़ारा न थे जो होश आता
मगर तुम्हारे तग़ाफ़ुल ने होश्यार किया
हमारे सीने में जो रह गई थी आतिश-ए-हिज्र
शब-ए-विसाल भी उस को न हम-कनार किया
रक़ीब ओ शेवा-ए-उल्फ़त ख़ुदा की क़ुदरत है
वो और इश्क़ भला तुम ने ए'तिबार किया
ज़बान-ए-ख़ार से निकली सदा-ए-बिस्मिल्लाह
जुनूँ को जब सर-ए-शोरीदा पर सवार किया
तिरी निगह के तसव्वुर में हम ने ऐ क़ातिल
लगा लगा के गले से छुरी को प्यार किया
ग़ज़ब थी कसरत-ए-महफ़िल कि मैं ने धोके में
हज़ार बार रक़ीबों को हम-कनार किया
हुआ है कोई मगर उस का चाहने वाला
कि आसमाँ ने तिरा शेवा इख़्तियार किया
न पूछ दिल की हक़ीक़त मगर ये कहते हैं
वो बे-क़रार रहे जिस ने बे-क़रार किया
जब उन को तर्ज़-ए-सितम आ गए तो होश आया
बुरा हो दिल का बुरे वक़्त होश्यार किया
फ़साना-ए-शब-ए-ग़म उन को इक कहानी थी
कुछ ए'तिबार किया कुछ न ए'तिबार किया
असीरी दिल-ए-आशुफ़्ता रंग ला के रही
तमाम तुर्रा-ए-तर्रार तार तार किया
कुछ आ गई दावर-ए-महशर से है उम्मीद मुझे
कुछ आप ने मिरे कहने का ए'तिबार किया
किसी के इश्क़-ए-निहाँ में ये बद-गुमानी थी
कि डरते डरते ख़ुदा पर भी आश्कार किया
फ़लक से तौर क़यामत के बन न पड़ते थे
अख़ीर अब तुझे आशोब-ए-रोज़गार किया
वो बात कर जो कभी आसमाँ से हो न सके
सितम किया तो बड़ा तू ने इफ़्तिख़ार किया
बनेगा मेहर-ए-क़यामत भी एक ख़ाल-ए-सियाह
जो चेहरा 'दाग़'-ए-सियह-रू ने आश्कार किया

दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ : मिर्ज़ा ग़ालिब

दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ
जम्अ' करते हो क्यूँ रक़ीबों को
इक तमाशा हुआ गिला न हुआ
हम कहाँ क़िस्मत आज़माने जाएँ
तू ही जब ख़ंजर-आज़मा न हुआ
कितने शीरीं हैं तेरे लब कि रक़ीब
गालियाँ खा के बे-मज़ा न हुआ
है ख़बर गर्म उन के आने की
आज ही घर में बोरिया न हुआ
क्या वो नमरूद की ख़ुदाई थी
बंदगी में मिरा भला न हुआ
जान दी दी हुई उसी की थी
हक़ तो यूँ है कि हक़ अदा न हुआ
ज़ख़्म गर दब गया लहू न थमा
काम गर रुक गया रवा न हुआ
रहज़नी है कि दिल-सितानी है
ले के दिल दिल-सिताँ रवाना हुआ
कुछ तो पढ़िए कि लोग कहते हैं
आज 'ग़ालिब' ग़ज़ल-सरा न हुआ

है बस-कि हर इक उन के इशारे में निशाँ और : मिर्ज़ा ग़ालिब

है बस-कि हर इक उन के इशारे में निशाँ और
करते हैं मोहब्बत तो गुज़रता है गुमाँ और
या-रब वो न समझे हैं न समझेंगे मिरी बात
दे और दिल उन को जो न दे मुझ को ज़बाँ और
अबरू से है क्या उस निगह-ए-नाज़ को पैवंद
है तीर मुक़र्रर मगर इस की है कमाँ और
तुम शहर में हो तो हमें क्या ग़म जब उठेंगे
ले आएँगे बाज़ार से जा कर दिल ओ जाँ और
हर चंद सुबुक-दस्त हुए बुत-शिकनी में
हम हैं तो अभी राह में है संग-ए-गिराँ और
है ख़ून-ए-जिगर जोश में दिल खोल के रोता
होते जो कई दीदा-ए-ख़ूँनाबा-फ़िशाँ और
मरता हूँ इस आवाज़ पे हर चंद सर उड़ जाए
जल्लाद को लेकिन वो कहे जाएँ कि हाँ और
लोगों को है ख़ुर्शीद-ए-जहाँ-ताब का धोका
हर रोज़ दिखाता हूँ मैं इक दाग़-ए-निहाँ और
लेता न अगर दिल तुम्हें देता कोई दम चैन
करता जो न मरता कोई दिन आह-ओ-फ़ुग़ाँ और
पाते नहीं जब राह तो चढ़ जाते हैं नाले
रुकती है मिरी तब्अ' तो होती है रवाँ और
हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और

ज़ुल्मत-कदे में मेरे शब-ए-ग़म का जोश है : मिर्ज़ा ग़ालिब

ज़ुल्मत-कदे में मेरे शब-ए-ग़म का जोश है
इक शम' है दलील-ए-सहर सो ख़मोश है
ने मुज़्दा-ए-विसाल न नज़्ज़ारा-ए-जमाल
मुद्दत हुई कि आश्ती-ए-चश्म-ओ-गोश है
मय ने किया है हुस्न-ए-ख़ुद-आरा को बे-हिजाब
ऐ शौक़ हाँ इजाज़त-ए-तस्लीम-ए-होश है
गौहर को अक़्द-ए-गर्दन-ए-ख़ूबाँ में देखना
क्या औज पर सितारा-ए-गौहर-फ़रोश है
दीदार बादा हौसला साक़ी निगाह मस्त
बज़्म-ए-ख़याल मय-कदा-ए-बे-ख़रोश है
ऐ ताज़ा वारदान-ए-बिसात-ए-हवा-ए-दिल
ज़िन्हार अगर तुम्हें हवस-ए-नाए-ओ-नोश है
देखो मुझे जो दीदा-ए-इबरत-निगाह हो
मेरी सुनो जो गोश-ए-नसीहत-नियोश है
साक़ी-ब-जल्वा दुश्मन-ए-ईमान-ओ-आगही
मुतरिब ब-नग़्मा रहज़न-ए-तम्कीन-ओ-होश है
या शब को देखते थे कि हर गोशा-ए-बिसात
दामान-ए-बाग़बान ओ कफ़-ए-गुल-फ़रोश है
लुफ़्त-ए-ख़िरम-ए-साक़ी ओ ज़ौक़-ए-सदा-ए-चंग
ये जन्नत-ए-निगाह वो फ़िरदौस-ए-गोश है
या सुब्ह-दम जो देखिए आ कर तो बज़्म में
ने वो सुरूर ओ सोज़ न जोश-ओ-ख़रोश है
दाग़-ए-फ़िराक़-ए-सोहबत-ए-शब की जली हुई
इक शम' रह गई है सो वो भी ख़मोश है
आते हैं ग़ैब से ये मज़ामीं ख़याल में
'ग़ालिब' सरीर-ए-ख़ामा नवा-ए-सरोश है
हो कर शहीद 'इश्क़ में पाए हज़ार जिस्म
हर मौज-ए-गर्द-ए-राह मिरे सर को दोश है

दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ : साहिर लुधियानवी

दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ
याद रह जाएगी ये रात क़रीब आ जाओ
एक मुद्दत से तमन्ना थी तुम्हें छूने की
आज बस में नहीं जज़्बात क़रीब आ जाओ
सर्द झोंकों से भड़कते हैं बदन में शो'ले
जान ले लेगी ये बरसात क़रीब आ जाओ
इस क़दर हम से झिजकने की ज़रूरत क्या है
ज़िंदगी भर का है अब साथ क़रीब आ जाओ

बरबाद-ए-मोहब्बत की दुआ साथ लिए जा : साहिर लुधियानवी

बरबाद-ए-मोहब्बत की दुआ साथ लिए जा
टूटा हुआ इक़रार-ए-वफ़ा साथ लिए जा
इक दिल था जो पहले ही तुझे सौंप दिया था
ये जान भी ऐ जान-ए-अदा साथ लिए जा
तपती हुई राहों से तुझे आँच न पहुँचे
दीवानों के अश्कों की घटा साथ लिए जा
शामिल है मिरा ख़ून-ए-जिगर तेरी हिना में
ये कम हो तो अब ख़ून-ए-वफ़ा साथ लिए जा
हम जुर्म-ए-मोहब्बत की सज़ा पाएँगे तन्हा
जो तुझ से हुई हो वो ख़ता साथ लिए जा

मिले न फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली : कैफ़ी आज़मी

मिले न फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली
इसी तरह से बसर हम ने ज़िंदगी कर ली
अब आगे जो भी हो अंजाम देखा जाएगा
ख़ुदा तलाश लिया और बंदगी कर ली
नज़र मिली भी न थी और उन को देख लिया
ज़बाँ खुली भी न थी और बात भी कर ली
वो जिन को प्यार है चाँदी से 'इश्क़ सोने से
वही कहेंगे कभी हम ने ख़ुद-कुशी कर ली

दिया है दिल अगर उस को बशर है क्या कहिए : मिर्ज़ा ग़ालिब

दिया है दिल अगर उस को बशर है क्या कहिए
हुआ रक़ीब तो हो नामा-बर है क्या कहिए
ये ज़िद कि आज न आवे और आए बिन न रहे
क़ज़ा से शिकवा हमें किस क़दर है क्या कहिए
रहे है यूँ गह-ओ-बे-गह कि कू-ए-दोस्त को अब
अगर न कहिए कि दुश्मन का घर है क्या कहिए
ज़हे करिश्मा कि यूँ दे रक्खा है हम को फ़रेब
कि बिन कहे ही उन्हें सब ख़बर है क्या कहिए
समझ के करते हैं बाज़ार में वो पुर्सिश-ए-हाल
कि ये कहे कि सर-ए-रहगुज़र है क्या कहिए
तुम्हें नहीं है सर-ए-रिश्ता-ए-वफ़ा का ख़याल
हमारे हाथ में कुछ है मगर है क्या कहिए
उन्हें सवाल पे ज़ोम-ए-जुनूँ है क्यूँ लड़िए
हमें जवाब से क़त-ए-नज़र है क्या कहिए
हसद सज़ा-ए-कमाल-ए-सुख़न है क्या कीजे
सितम बहा-ए-मता-ए-हुनर है क्या कहिए
कहा है किस ने कि 'ग़ालिब' बुरा नहीं लेकिन
सिवाए इस के कि आशुफ़्ता-सर है क्या कहिए

न तू ज़मीं के लिए है न आसमाँ के लिए : साहिर लुधियानवी

न तू ज़मीं के लिए है न आसमाँ के लिए
तिरा वजूद है अब सिर्फ़ दास्ताँ के लिए
पलट के सू-ए-चमन देखने से क्या होगा
वो शाख़ ही न रही जो थी आशियाँ के लिए
ग़रज़-परस्त जहाँ में वफ़ा तलाश न कर
ये शय बनी थी किसी दूसरे जहाँ के लिए

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आए सवालों की तरह : सुदर्शन फ़ाकिर

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आए सवालों की तरह
हम परेशाँ ही रहे अपने ख़यालों की तरह
शीशागर बैठे रहे ज़िक्र-ए-मसीहा ले कर
और हम टूट गए काँच के प्यालों की तरह
जब भी अंजाम-ए-मोहब्बत ने पुकारा ख़ुद को
वक़्त ने पेश किया हम को मिसालों की तरह
ज़िक्र जब होगा मोहब्बत में तबाही का कहीं
याद हम आएँगे दुनिया को हवालों की तरह

छलके तिरी आँखों से शराब और ज़ियादा : हसरत जयपुरी

छलके तिरी आँखों से शराब और ज़ियादा
खिलते रहें होंठों के गुलाब और ज़ियादा
क्या बात है जाने तिरी महफ़िल में सितमगर
धड़के है दिल-ए-ख़ाना-ख़राब और ज़ियादा
इस दिल में अभी और भी ज़ख़्मों की जगह है
अबरू की कटारी को दो आब और ज़ियादा
तू इश्क़ के तूफ़ान को बाँहों में जकड़ ले
अल्लाह करे ज़ोर-ए-शबाब और ज़ियादा

कोई साग़र दिल को बहलाता नहीं : शकील बदायूनी

कोई साग़र दिल को बहलाता नहीं
बे-ख़ुदी में भी क़रार आता नहीं
मैं कोई पत्थर नहीं इंसान हूँ
कैसे कह दूँ ग़म से घबराता नहीं
कल तो सब थे कारवाँ के साथ साथ
आज कोई राह दिखलाता नहीं
ज़िंदगी के आइने को तोड़ दो
इस में अब कुछ भी नज़र आता नहीं

सांवरियो परणाय लोकगीत : Sanwariyo Parnay Geet Lyrics

  

राणै वर रा कांई परणीजूं

जलम-जलम मर जाय

वर परणीजूं श्याम (सांवरा) नों

म्हारो (थांरो) अमर चूड़ो होए जाय

कोड करै म्हारी मां

मीरां नै सांवरियो परणाय

हरख करै म्हारी मां

मीरां नै गिरधारी परणाय

राणै बासंग छेड़िया

ज्यों/ग्या मीरा रे हाथ

हार करै मीरां हलोळिया

मनां सांवरियो परणाय

कोड करै म्हारी मां

मीरां नै सांवरियो परणाय

हरख करै म्हारी मां

मीरां नै गिरधारी परणाय

राणै प्याला भेजिया

द्यो/ग्या मीरां रे हाथ

अमरत करै मीरा आरोगिया

मनां सांवरियो परणाय

कोड करै म्हारी मां

मीरां नै सांवरियो परणाय

हरख करै म्हारी मां

मीरां नै गिरधारी परणाय

बोल्या बाई मीरां

गिरधर रा गुण गाय

कोड करै म्हारी मां

मीरां नै सांवरियो परणाय

हरख करै म्हारी मां

मीरां नै गिरधारी परणाय

Saanvariyo Parnay Lokgeet Lyrics English

Raanai var ra kaai parneejun

Jalam-jalam mar jaay

Var parneejun Shyaam (Saanvara) non

Mharo (thaaro) amar chooḍo hoye jaay

Kod karai mhaari maan

Meera nai Saanvariyo parnaay

Harakh karai mhaari maan

Meera nai Girdhaari parnaay

Raanai baasang chheḍiya

Jyon/gya Meera re haath

Haar karai Meera haloliya

Mana Saanvariyo parnaay

Kod karai mhaari maan

Meera nai Saanvariyo parnaay

Harakh karai mhaari maan

Meera nai Girdhaari parnaay

Raanai pyaala bhejiya

Dyo/gya Meera re haath

Amarat karai Meera aarogiya

Mana Saanvariyo parnaay

Kod karai mhaari maan

Meera nai Saanvariyo parnaay

Harakh karai mhaari maan

Meera nai Girdhaari parnaay

Bolya baai Meera

Girdhar ra gun gaay

Kod karai mhaari maan

Meera nai Saanvariyo parnaay

Harakh karai mhaari maan

Meera nai Girdhaari parnaay

जब ज़िद पे आ गई पार्वती : Parvati Lyrics in Hindi – Hanuman Ansh

  

Parvati Lyrics in Hindi sung, written and composed by Sadhu S. Tiwari. Starring Shobhinaw Satyaa, Chandan k Anand,Vihan Shedge, Anil Rastogi, Purnima Tiwari, Neha Paranjpe, Nikhil Dubey, Rishikesh Dubey and Rajiv Mishra. Music label Times Music.


Parvati Lyrics in Hindi – Sadhu S. Tiwari

जब ज़िद पे आ गई पार्वती

पार्वती पार्वती

समझाने पहुँचे सप्तऋषि

सप्तऋषि सप्तऋषि


काय ज़िद कर रही

काय को मर रही

काय ज़िद कर रही

काय को मर रही

ऐसे वर के लाने


काय ज़िद कर रही

काय को मर रही

ऐसे वर के लाने


जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

इतने सीधे-सादे हैं

सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ


जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

इतने सीधे-सादे हैं

सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ


ना खपरा ना छपरा

ना फूस की धरे मड़इया

का खावे को धरो वहाँ

बस रोवत रहत लड़इया


ना खपरा ना छपरा

ना फूस की धरे मड़इया

का खावे को धरो वहाँ

बस रोवत रहत लड़इया


भेष धरे अवधूत फिरे

अब तुमसे का कहे बिन्नू

डोरा डांगर ले घूमें

वे इनके कछुए नइयाँ

वे इनके कछुए नइयाँ


काय ज़िद कर रही

काय तप कर रही

काय ज़िद कर रही

काय को मर रही

ऐसे वर के लाने

हाँ ऐसे वर के लाने


जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

इतने सीधे-सादे हैं

सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ


जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

इतने सीधे-सादे हैं

सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ


शंभु.. शिव शंभु, भोलेनाथ


जटा लटा न कबहुँ सँवारे

दीसत महा भयंकर

मूड़ पे आधो चंदा और

बेला पे घूमे शंकर


जटा लटा न कबहुँ सँवारे

दीसत महा भयंकर

मूड़ पे आधो चंदा और

बेला पे घूमे शंकर


राम नाम के रसिया हैं वे

और उन्हें क्या चाहने

कामदेव के मर्दनहारी

घर-गृहस्थी क्या जाने

वे घर-गृहस्थी क्या जाने


काय ज़िद कर रही

काय को मर रही

अरे काय ज़िद कर रही

काय तप कर रही

ऐसे वर के लाने

तेन्नू ऐसे वर के लाने


जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

इतने सीधे-सादे हैं

सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ


जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

इतने सीधे-सादे हैं

सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ


भोले बम भोले

भोले बम भोले

भोले बम भोले

जय जय शिवशंभु


Parvati Lyrics in English

Jab zid pe aa gayi parvati

Parvati parvati

Samjhane pahunche saptarishi

Saptarishi saptarishi


Kaay zid kar rahi

Kaay ko mar rahi

Kaay zid kar rahi

Kaay ko mar rahi

Aise var ke laane


Kaay zid kar rahi

Kaay ko mar rahi

Aise var ke laane


Jaake sees pe ganga aur gale mein

Daale phir rahe saanp

Jaake sees pe ganga aur gale mein

Daale phir rahe saanp

Itne seedhe-saade hain

Sab kehte bholenath, bholenath


Jaake sees pe ganga aur gale mein

Daale phir rahe saanp

Itne seedhe-saade hain

Sab kehte bholenath, bholenath


Na khapra na chhapra

Na foos ki dhare madaiya

Ka khaave ko dharo wahan

Bas rowat rahat ladaiya


Na khapra na chhapra

Na foos ki dhare madaiya

Ka khaave ko dharo wahan

Bas rowat rahat ladaiya


Bhesh dhare avdhoot phire

Ab tumse ka kahe binnu

Dora dangar le ghoomein

Ve inke kachhue naiyaan

Ve inke kachhue naiyaan


Kaay zid kar rahi

Kaay tap kar rahi

Kaay zid kar rahi

Kaay ko mar rahi

Aise var ke laane

Haan, aise var ke laane


Jaake sees pe ganga aur gale mein

Daale phir rahe saanp

Jaake sees pe ganga aur gale mein

Daale phir rahe saanp

Itne seedhe-saade hain

Sab kehte bholenath, bholenath


Jaake sees pe ganga aur gale mein

Daale phir rahe saanp

Itne seedhe-saade hain

Sab kehte bholenath, bholenath


Shambhu… shiv shambhu, bholenath


Jata lata na kabahun sanwaare

Deesat maha bhayankar

Mood pe aadho chanda aur

Bela pe ghoome shankar


Jata lata na kabahun sanwaare

Deesat maha bhayankar

Mood pe aadho chanda aur

Bela pe ghoome shankar


Ram naam ke rasiya hain ve

Aur unhein kya chaahne

Kaamdev ke mardanhaari

Ghar-grihasthi kya jaane

Ve ghar-grihasthi kya jaane


Kaay zid kar rahi

Kaay ko mar rahi

Are kaay zid kar rahi

Kaay tap kar rahi

Aise var ke laane

Tennu aise var ke laane


Jaake sees pe ganga aur gale mein

Daale phir rahe saanp

Jaake sees pe ganga aur gale mein

Daale phir rahe saanp

Itne seedhe-saade hain

Sab kehte bholenath, bholenath


Jaake sees pe ganga aur gale mein

Daale phir rahe saanp

Itne seedhe-saade hain

Sab kehte bholenath, bholenath


Bhole bam bhole

Bhole bam bhole

Bhole bam bhole

Jai jai shivshambhu

वादे सारे किधर गए : Waade Saare Lyrics in Hindi – Jubin Nautiyal

  

Waade Saare Lyrics in Hindi sung by Jubin Nautiyal. The song is written by Kaushal Kishore and the music is composed by Shubham Srivastava. Music label T-Series.


Waade Saare Lyrics in Hindi – Kaushal Kishore

जिस्म में था तू जान के जैसे

ऐसे कैसे दोनों खो गए

आया तुझे ना इश्क निभाना

तुम भी औरों जैसे हो गए

नहीं ये नहीं ये तो नहीं होने वाला था ना

कैसे दोनों बिछड़ गए

वादे सारे किधर गए

कैसे दोनों बिछड़ गए

ये तो नहीं होने वाला था ना

दिल से कैसे उतर गए


एक दर्द का समंदर

तन्हा मैं जिसके अंदर

जहां गम हर दम दिल में चुभता रहे

भीगी हुई यह आंखें

कहां छोड़ा तूने लाके

ये जख्म है सितम तुमसे हमदम मिले

मांगू अब तो मैं रब से बस यही

मर जाएंगे ना मिलेंगे फिर कभी

ये तो नहीं होने वाला था ना

वादे सारे किधर गए

कैसे दोनों बिछड़ गए

वादे सारे किधर गए

कैसे दोनों बिछड़ गए


मेरा दिल मेरी जान जैसे जलता जहां

सब कुछ मेरा बर्बाद हुआ

हो गया है जुदा जो था मेरा खुदा

जैसे जिस्म से रूह आजाद हुआ

वादे सारे किधर गए


Waade Saare Lyrics in English

Jism mein tha tu jaan ke jaise

Aise kaise dono kho gaye

Aaya tujhe na ishq nibhana

Tum bhi auron jaise ho gaye

Nahin ye nahin ye to nahin hone wala tha na

Kaise dono bichhad gaye

Waade saare kidhar gaye

Kaise dono bichhad gaye

Ye to nahin hone wala tha na

Dil se kaise utar gaye


Ek dard ka samandar

Tanha main jiske andar

Jahan gham har dam dil mein chubhta rahe

Bheegi hui ye aankhen

Kahan chhoda tune laake

Ye zakhm hai sitam tumse humdam mile

Maangu ab to main rab se bas yahi

Mar jaayenge na milenge phir kabhi

Ye to nahin hone wala tha na

Waade saare kidhar gaye

Kaise dono bichhad gaye

Waade saare kidhar gaye

Kaise dono bichhad gaye


Mera dil meri jaan jaise jalta jahan

Sab kuch mera barbaad hua

Ho gaya hai juda jo tha mera khuda

Jaise jism se rooh azaad hua

Waade saare kidhar gaye

बजरंग बाण लिखित में हिंदी अंग्रेज़ी Lyrics : Bajrang Baan Hindi English


बजरंग बाण भगवान हनुमान को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिपूर्ण स्तोत्र है। इसके रचयिता के रूप में गोस्वामी तुलसीदास जी का नाम प्रचलित है। इसमें भक्त संकट, भय और बाधाओं से मुक्ति के लिए वीर हनुमान का स्मरण और आह्वान करता है।

बजरंग बाण में भगवान हनुमान की शक्ति, पराक्रम, भक्ति और संकटमोचक स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन मिलता है। हनुमान भक्तों के बीच इसका पाठ विशेष रूप से कठिन परिस्थितियों और संकट के समय श्रद्धा एवं विश्वास के साथ किया जाता है।

बजरंग बाण को समय-समय पर अनेक प्रसिद्ध संतों, भजन गायकों और संगीतकारों ने अपनी-अपनी शैली में संगीतबद्ध और प्रस्तुत किया है। इनमें रसराज जी महाराज,  गुलशन कुमार और प्रसिद्ध गायक हरिहरन सहित बॉलीवुड तथा संगीत जगत के अनेक कलाकारों की प्रस्तुतियाँ भी लोकप्रिय रही हैं। इस स्तोत्र की लोकप्रियता आज भी भक्तों और संगीत प्रेमियों के बीच बनी हुई है।

बजरंग बाण का वीडियो : Bajrang Baan Video 



बजरंग बाण हिंदी लिरिक्स 

निश्चय प्रेम प्रतीति ते

विनय करै सनमान

तेहि के कारज सकल शुभ

सिद्ध करै हनुमान


जै हनुमंत संत हितकारी

सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी

जन के काज बिलंब ना कीजै

आतुर दौरि महा सुख दीजै

जैसे कूदि सिंधु के पारा

सुरसा बदन पैठि बिस्तारा

आगे जाय लंकिनी रोका

मारेहु लात गई सुर लोका

जाय बिभीषन को सुख दीन्हा

सीता निरखि परम-पद लीन्हा

बाग उजारि सिंधु मंह बोरा

अति आतुर यम कातर तोरा

अक्षय कुमार को मारि संहारा

लूम लपेटि लंक को जारा

लाह समान लंक जरि गई

जै-जै-जै धुनि सुर पुर में भई

अब बिलंब केहि कारण स्वामी

कृपा करहु उर अंतर्यामी

जै-जै लछमन प्राण के दाता

आतुर होई दुख करहु निपाता

जै गिरिधर, जै-जै सुख सागर

सुर-समूह-समरथ भट-नागर

ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले

बैरिहि मारु बज्र की कीले

गदा बज्र लै बैरिहि मारो

महाराज प्रभु दास उबारो

ओंकार हुंकार प्रभु धावो

बज्र गदा हनु विलम्ब ना लावो

ॐ ह्नीं-ह्नीं-ह्नीं हनुमंत कपीशा

ॐ हुं-हुं-हुं हनु अरि उर शीसा

सत्य होउ हरि शपथ पायके

रामदूत धरु मारु धाय के

जै-जै-जै हनुमंत अगाधा

दुख पावत जन केहि अपराधा

पूजा जप तप नेम अचारा

नहिं जानत कछु दास तुम्हारा

वन उपवन मग गिरि गृह माहीं

तुमरे बल हम डरपत नाहीं

पाँय परौं कर जोरी मनावौं

यहि अवसर अब केहि गोहरावौं

जै अंजनि कुमार बलवंता

शंकर सुवन वीर हनुमंता

बदन कराल काल-कुल-घालक

राम सहाय सदा प्रतिपालक

भूत, प्रेत, पिशाच, निशाचर

अग्नि बेताल काल मारी मर

इन्हहिं मारु, तोहि शपथ राम की

राखु नाथ मर्याद नाम की

जनकसुता हरि दास कहावो

ताकी शपथ विलम्ब ना लावो

जै-जै-जै धुनि होत अकाशा

सुमिरत होत दुसह दुख नाशा

चरण शरण करि जोरि मनावौ

यहि अवसर अब केहि गोहरावौ

उठु-उठु चलु तोहि राम-दुहाई

पाँय परौं, कर जोरि मनाई

ॐ चं-चं-चं-चं चपल चलंता

ॐ हनु-हनु-हनु-हनु हनुमंता

ॐ हं-हं हांक देत कपि चंचल

ॐ सं-सं सहमि पराने खल-दल

अपने जन को तुरत उबारौ

सुमिरत होय आनंद हमारौ

यह बजरंग-बाण जेहि मारै

ताहि कहो फिर कोन उबारै?

पाठ करै बजरंग-बाण की

हनुमत रक्षा करै प्राण की

यह बजरंग बाण जो जापै

तातै भूत-प्रेत सब काँपै

धूप देय अरु जपै हमेसा

ताके तन नहिं रहै कलेसा

जै हनुमान, जै हनुमान

जै हनुमान, जै-जै हनुमान

जै हनुमान, जै-जै हनुमान

जै-जै हनुमान, जै-जै हनुमान

जै हनुमान, जै-जै हनुमान

जै-जै हनुमान, जै-जै हनुमान


प्रेम प्रतीति कपि भजै

सदा धरै उर ध्यान

तेहि के कारज सकल शुभ

सिद्ध करै हनुमान

Bajrang Baan Likhit Hindi Mein Roman Hindi

Nishchay prem prateeti te  

Vinay karai sanmaan  

Tehi ke kaaraj sakal shubh  

Siddh karai Hanuman  


Jai Hanumant sant hitkaari  

Suni leejai Prabhu araj hamaari  

Jan ke kaaj bilamb na keejai  

Aatur dauri maha sukh deejai  

Jaise koodi sindhu ke paara  

Sursa badan paithi bistaara  

Aage jaay Lankini roka  

Maarehu laat gai sur loka  

Jaay Bibhishan ko sukh deenha  

Sita nirakhi param-pad leenha  

Baag ujaari sindhu manh bora  

Ati aatur Yam kaatar tora  

Akshay Kumar ko maari sanhaara  

Loom lapeti Lank ko jaara  

Laah samaan Lank jari gai  

Jai-jai-jai dhuni sur pur mein bhai  

Ab bilamb kehi kaaran Swaami  

Kripa karahu ur antaryaami  

Jai-jai Lachhman praan ke daata  

Aatur hoi dukh karahu nipaata  

Jai Giridhar, jai-jai sukh saagar  

Sur-samuh-samarth bhat-naagar  

Om Hanu-hanu-hanu Hanumant hatheele  

Bairihi maaru bajra ki keele  

Gada bajra lai bairihi maaro  

Mahaaraaj Prabhu daas ubaaro  

Onkaar hunkaar Prabhu dhaavo  

Bajra gada hanu vilamb na laavo  

Om hreem-hreem-hreem Hanumant Kapeesha  

Om hum-hum-hum Hanu ari ur sheesa  

Satya hou Hari shapath paayake  

Raamdoot dharu maaru dhaay ke  

Jai-jai-jai Hanumant agaadha  

Dukh paavat jan kehi aparaadha  

Pooja jap tap nem achaara  

Nahin jaanat kachhu daas tumhaara  

Van upvan mag giri grih maahin  

Tumhare bal hum darpat naahin  

Paay paro kar jori manaavau  

Yahi avasar ab kehi goharaavau  

Jai Anjani Kumar balvanta  

Shankar suvan veer Hanumanta  

Badan karaal Kaal-kul-ghaalak  

Raam sahaay sada pratipaalak  

Bhoot, pret, pishaach, nishaachar  

Agni betaal Kaal maari mar  

Inhahin maaru, tohi shapath Raam ki  

Raakhu Naath maryaad naam ki  

Janaksuta Hari daas kahaavo  

Taaki shapath vilamb na laavo  

Jai-jai-jai dhuni hot aakaasha  

Sumirat hot dusah dukh naasha  

Charan sharan kari jori manaavau  

Yahi avasar ab kehi goharaavau  

Uthu-uthu chalu tohi Raam-duhaai  

Paay paro, kar jor manaai  

Om cham-cham-cham-cham chapal chalanta  

Om Hanu-hanu-hanu-hanu Hanumanta  

Om ham-ham haank det Kapi chanchal  

Om sam-sam sahamii paraane khal-dal  

Apne jan ko turat ubaarau  

Sumirat hoy aanand hamaarau  

Yah Bajrang-baan jehi maarai  

Taahi kaho phir kaun ubaarai?  

Paath karai Bajrang-baan ki  

Hanumat raksha karai praan ki  

Yah Bajrang baan jo jaapai  

Taatai bhoot-pret sab kaampai  

Dhoop dey aru japai hamesha  

Taake tan nahin rahai kalesha  

Jai Hanuman, jai Hanuman  

Jai Hanuman, jai-jai Hanuman  

Jai Hanuman, jai-jai Hanuman  

Jai-jai Hanuman, jai-jai Hanuman  

Jai Hanuman, jai-jai Hanuman  

Jai-jai Hanuman, jai-jai Hanuman  


Prem prateeti Kapi bhajai  

Sada dharai ur dhyaan  

Tehi ke kaaraj sakal shubh  

Siddh karai Hanuman

Featured post

क़ुली क़ुतुब शाह की ग़ज़लें : Kuli Kutub Shah Ghazal Hindi

पिया बाज प्याला पिया जाए ना : क़ुली क़ुतुब शाह मदन मस्त बदल मस्त कजन मस्त परी मस्त : क़ुली क़ुतुब शाह हमारा सजन ख़ुश-नज...

Popular Posts

Labels

1857 Diary The Hidden Pages Songs 2 Duni 4 Lyrics 2013 Songs 2014 Songs 2015 Songs 750 Pound Lyrics A. R. Rahman Aaja Veere Aaja Veere Lyrics Abdul Hai Anjum Abhishek Kumar Aditya A Songs Afsana Khan Songs Agaazz Ahaan Panday Ajay - Atul Ajay Gogavale Ajit Arora Akh Lal Lyrics Akhil Sachdeva Songs Akshay Kumar Alka Yagnik Altamash Faridi Aman Pant Amber Amit Ameer Amit Trivedi Amitabh Bhattacharya Ammy Virk Songs Anand - Milind Anand Bakshi Aneet Padda Anjaan Anshika Pandey Anu Malik Anuradha Paudwal Anvita Dutt Arijit Singh Arjuna Harjai Arooj Aftab Arslan Nizami Asad Bhopali Asees Kaur Asha Bhosle Ashar Songs Asle Asle Lyrics Atif Aslam Ayaz Jhanswi Azul B Praak B Praak & Siddhaant Miishhraa Baaghi 4 Baaghi 4 Songs Badmashi Badmashi Lyrics Badshah Songs Bahli Sohni Lyrics Bajrang Baan in English bajrang baan lyrics Bamb Beats Bannet Dosanjh Bannet Dosanjh and Sultaan Bappi Lahiri Barbaad Reprise Lyrics Bawaria Beast Beat Minister Beatcop Begam Akhtar Bhai Vakeel Hai Lyrics Bharat Vyas Bharg Bhupen Hazarika Bhupendra Bicep Lyrics Bichadna Lyrics Bigleaf Infotech Bijuria Lyrics Black Virus Bollywood Dance Track Bollywood Poetic Songs Bollywood Song Lyrics Bollywood Songs Bollywood Soulful Songs Bombay Shehar Bombay Shehar Lyrics BOPS Music Brijesh Shandilya Songs Bunny Bunty Bains C. Ramchandra Chandigarh Chandigarh Lyrics Chill Mardi Chill Mardi Lyrics Chitragupt Clik Records Cndlx Darsh Dhaliwal Songs Deep Arraicha Deep Jandu Deep Jandu Songs Deepika Padukone Desi Crew Desi Kalakaar Desi Melodies Desi Tune Records Dhadak 2 Dhadak 2 2025 Dhadak 2 Songs Dhul Gaye Dhwanit Joshi Diamond Diaspora Songs Diljit Dosanjh Diljit Dosanjh Songs Dilmaan Din Lyrics Divya Kumar Songs Don Julio Lyrics Dooriyaan Dooriyaan Lyrics Drishhty Talwar DRJ Records Duniya Alag Eisha Singh Elnaaz Norouzi Emotional Punjabi Songs Faheem Abdullah Faiz Anwar Faragh Roohvi Fateh Shergill Female Empowerment Songs Filter by dateFilter by category26 items For A Reason Lyrics Freq Records Fresh Media Records G.L.Rawal Gaane Gaane Lyrics in Hindi | Arijit Singh Gagan Kokri Songs Gaiphy Gallan Karke Lyrics Garry Sandhu Songs Garvit Soni Geet Geeta Dutt Ghazal Ghulam Ali Gill Raunta Gill Ronny Gippy Grewal Govardhan Girdhari Lyrics Gulab Sidhu Gulab Sidhu Music Gulab Sidhu Songs Gulraj Singh Gulshan Bawra Gulzar Gulzar Lyrics Gur Aulakh Gur Marahar Guri Gurjit Gill Gurlez Akhtar Songs Gurpreet Saini Guru Randhawa Guzaara Lyrics Hanuman Ansh Parvati Hanuman Bhajan Hariharan Hasrat Jaipuri Heer Express Heer Express Songs Hemant Kumar Her Lyrics Himesh Reshammiya Himesh Reshammiya Melodies Himesh Reshammiya Songs Hindi Bhajan Hindi Lyrics Hindi Lyrics in Hindi Hindi Movie Songs Hindi Party Song Hindi Patriotic Songs Hindi Poetry Songs Hindi Punjabi Songs Hindi Romantic Songs Hindi Sad Songs Hindi Song Lyircs Mix Hindi Songs Hindi Travel Songs Hrithik Roshan I Love My India Lyrics I Studios Ikky Ilahi Indeevar Insaaf IRIS Music Irrfan Khan Irshad Kamil Isha Malviya Ishaan Arora Ishq Bukhaar Ja Nisaar Akhtar Jaani Jagdeep Warring Jagjit Kaur Jagjit Singh Jaidev Janaab-e-Aali Lyrics Jang Dhillon Jasmin Bajwa Jassi X Jatin - Lalit Javed Akhtar Javed Ali Javed Ali Songs Jay K Jeete Jeete Lyrics Jerry Jerry Songs Jigar Muradabadi Jind Mahi Jogiya Lyrics Jolly LLB 3 Songs Jonita Gandhi Josh Brar Josh Sidhu JP47 Jubin Nautiyal Jubin Nautiyal Songs Junior NTR Just Dance Lyrics Justice Theme Songs Kabhi Ram Banke Kabhi Shyam Banke Lyrics Kaifi Azmi Kalyanji Anandji Kaptaan Karamjit Puri Karan Aujla Songs Kashika Kapoor Kaur B Kausar Munir Kaushal Kishore Kavita Krishnamurthy Kavitha Krishnamurthi KD Desirock Khadak Singh Khayyam King Kishore Kumar Knockout Lyrics Koi Koi Karda Lyrics Krishna Beuraa Kuli Kutub Shah Kulshan Sandhu Kulwinder Billa Kulwinder Kinda Kumaar Kumar Sanu Kunaal Verma Kunwar Anshith Laddi Chahal Lakhi Ghuman Songs Lala Lala Lyrics Lata Lata Mangeshkar Laxmikant Pyarelal Leaf Records Leo Grewal Songs Lil Golu Lokdhun Love Pathak Lucky Ali Lyrics Lyrics in Hindi M.M.Kreem Maa Lyrics Maahi Maahi O Maahi Lyrics Mad Mix Mad Mix Music Madan Mohan Mahalakshmi Iyer Mahavatar Narasimha Lyrics Mahavtar Narsimha Mahendra Arya Mahendra Kapoor Majrooh Sultanpuri Mandeep Maavi Mandy Takhar Mangesh Kulkarni Mani Moudgill Mankirt Aulakh Mankirt Aulakh Music Mankirt Aulakh Songs Manna Dey Manoj Muntashir Mansha Imam Marjaana Marju Koi Lyrics Master Mind Mean Lyrics Meavin Mehdi Hasan Mirchan Mirza Shauq Mix Hindi Lyrics Mix Hindi Lyrics in Hindi Font Mohammad Aziz Mohammad Irfan Mohammad Rafi Mohit Chauhan Mukesh Muskaan Bisaria MVIJATT Records N.Dutta Naa Tere Jaisa Yaar Mileya Nadeem Nadeem - Shravan Naqsh Lyallpuri Narci Narci Songs Nasir Kazmi Naushad Nav Draaka Navi Ferozpurwala Nazaar Lagge Na Neeraj Neeru Bajwa Ni Tu Baar Baar Lyrics Nida Fazli Nikhil D’Souza Nikhita Gandhi Nikhita Gandhi Songs Nishawn Bhullar Songs Noor Jehan Nora Fatehi NTR O Gujariya O. P. Nayyar Oh Mama Tetema Oh Mama Tetema Lyrics Om Namo Bhagavate Vasudevaya One Take Worldwide One Thousand Miles Lyrics Oriyon Music Ozil Dalal Palak Muchhal Pandurang Dixit Pankaj Udhas Panorama Music Parampara Tandon Pardeep Sran Pardeep Sran Songs Pardhaan Parmish Verma Parmish Verma Songs Pav Dharia Pav Dharia Songs Pawan Singh Songs Payal Dev Payal Dev Songs Pind To Playlist Piyush Khati Play DMF Pradeep Praise Lyrics Pranjal Dahiya Prantika Das Prapti Lyrics Prasoon Joshi Prem Dhawan President Lyrics Prince Pritam Pritam Songs Priya Panchal Priyansh Srivastava Prove Them Wrong Lyrics Punjabi Lyrics Punjabi Songs Punjabi Youth Songs Pyaar Mein Hain Hum Lyrics Pyar Karta Hun Lyrics Qaiser-Ul-Jaffri Qamar Jalalabadi Qateel Shifai Qismat Lyrics Queen R Nait Songs Rab Se Hai Dua Lyrics Radha Ke Charan Lyrics Rahul Dev Burman Raj Shekhar Rajendra Krishna Rajesh roshan Rakaaney Lyrics Ramz Lyrics Ranbir Kapoor Rani Malik rasraj maharaj Ravi Ravindra Jain Rayvanny Rayvanny Songs Red Leaf Music Rehaan Records Resham Ki Dor Lyrics Ritu Matharoo RJBeats Robby Ladhar Rochak Kohli Romantic Punjabi Songs Romi Bains Rox A Royal Music Gang S. H. bihari S. P. Balasubramaniam S.N.Tripathi S.P Balasubramanyam Saaj Bhatt Saaz Lyrics Sachet Tandon Songs Sachin Dev Burman Sachin Jigar Sadhana Sargam Sadhu S. Tiwari Saeed Rahi Sagar Sahib Heera Sahir Ludhianvi Saiyaara Saiz Bajwa Saiz Bajwa Music Saiz Bajwa Songs Sajid - Wajid Saleel Chowdhury Sam Bhattacharya Sameer Sameer Anjaan Samunder Lyrics Sandeep Banerji Sandhu Kuldeep Sanjeev Chaturvedi Sanjith Hegde Sargi Maan Sargi Maan Songs Satinder Sartaaj Satinder Sartaaj Lyrics Satinder Sartaaj Songs SDA Studios Sehaz Mann Shaan Shahid Kabir Shailendra Shakeel Badayuni Shamshad Begum Shankar Jaikishan Shefali Alvaris Shehnaaz Gill Shilpa Rao Shipra Goyal Shloke Lal Shree Brar Shreya Ghosal Shreya Ghoshal Shreya Ghoshal | Anupam Roy | Saregama Shreya Ghoshal Songs Shreya Jain Shreyas Puranik Shubham Srivastava Siddhant Chaturvedi Siddharth Garima Sonu Bajwa Sonu Nigam Sonu Nigam & Ajay Sony Music India Sony Thulewal Speed Records Starboy X Stebin Ben Sudarshan Faakir Sukh Lotey Sukhan Verma Sunidhi Chauhan Sunidhi Chouhan Sunny Sanskari Ki Tulsi Kumari Supernova Muzic Surabhi Dashputra Suresh Wadkar Suril Vispute Surjit Bhullar Songs Suvarna Tiwari T-Series T-Series Songs Taimet Talash Lyrics Talat Mehmood Talvar Tanishk Bagchi Tanvi The Great Tanvir Naqvi Taweez Lyrics Tehran 2025 Tesher The Plugz Europe The Rish (Rishabh Kant) Tiger Shroff Tiger Songs Times Music Tips Official Toxic Treff E Trio Records Triptii Dimri Tu Kaahe Ka Maalik Lyrics Tulsi Kumar Tulsi Kumar Songs Tulsidas ji Bajrang Baan Tuttiyan Tandaa Udit Narayan Vasant Desai Ve Mundeya Lyrics Vicky Dhaliwal Vicky Dhand Vijay Prakash Vishal - Shekhar Vishal Bhardwaj Vishal Mishra Vishal Mishra Songs Vseer War 2 Songs When And Where Lyrics White Hill Music Xzeus Yaadan Sahaare Lyrics Yasser Desai Yasser Desai Songs Ye Kaisa Ishq Ye Kaisa Ishq Lyrics Yeh Jawaani Hai Deewani Yeh Zindagi Yesudas Yo Yo Honey Singh Songs Yogesh YRF Zaara Yesmin Zafar Gorakhpuri Zain Desai Zareen Khan Zee Music Company Zee Music Songs Zindagi Lyrics अजय - अतुल अजय गोगावले अंजान अनुराधा पौडवाल अनू मलिक अब्दुल हई अंजुम अमर अमिताभ भट्टाचार्य अयाज़ झांसवी अरिजीत सिंग अरिजीत सिंह अल्का याग्निक असद भोपाली आड़ी वाड़ी सोना री वाड़ी आतिफ असलम आनंद - मिलींद आनंद बक्षी आनंद बख्शी आशा भोसले इंदिवर उत्पल उदित नारायण ए. आर. रहमान एन. दत्ता एम. एम. क्रीम एस. एच. बिहारी एस. एन. त्रिपाठी एस्. पी. बालसुब्रमण्यम ओ. पी. नय्यर क़तील शिफ़ाई क़मर जलालाबादी कल्याणजी आनंदजी कविता कृष्णमुर्ती किशोर कुमार कुमार सानू कुली कुतुब शाह कैफी आज़मी कैसर-उल-जाफ़री खय्याम गजल ग़ज़ल गीता दत्त गुलज़ार गुलशन बावरा गुलाम अली ग़ुलाम अली चित्रगुप्त जगजीत कौर जगजीत सिंग जगजीत सिंग - चित्रा सिंग जगजीत सिंह जगजीत सिंह - चित्रा सिंह जतिन - ललित ज़फर गोरखपुरी जयदेव जां निसार अख्तर जावेद अख्तर जावेद अली जिगर मुरादाबादी जी.एल.रावल तन्वीर नक्व़ी तलत मेहमूद दशामाता की कहानी नक्श लायलपूरी नदीम नदीम - श्रवण नासिर काज़मी निदा फ़ाज़ली नीरज नूरजहां नौशाद पंकज उधास पलक मुच्छल पांडुरंग दिक्षित प्रदीप प्रसून जोशी प्रिया पांचल प्रीतम प्रेम धवन फ़राग़ रोहवी फैज़ अन्वर बप्पी लाहिरी बेगम अख्तर भरत व्यास भूपेंद्र मंगेश कुलकर्णी मजरूह सुलतानपुरी मजरूह सुल्तानपुरी मदन मोहन मन्ना डे महालक्ष्मी अय्यर महेंद्र कपूर मारवाड़ी मिर्ज़ा शौक मिश्रित हिंदी लिरिक्स मीरा मुकेश मेहदी हसन मोहम्मद इरफ़ान मोहम्मद रफी मोहोम्मद अज़ीज़ यासेर देसाई येशुदास योगेश रविन्द्र जैन रवी राजेन्द्र कृष्ण राजेश रोशन रानी मलिक राहुल देव बर्मन लकी अली लक्ष्मीकांत प्यारेलाल लता लता मंगेशकर लोकगीत वसंत देसाई विशाल - शेखर शंकर जयकिशन शकिल बदायुनी शमशाद बेग़म शाहिद कबीर शैलेन्द्र शैलेन्द्रएस. एन. त्रिपाठी श्रेया घोषाल सईद राही सचिन जिगर सचिन देव बर्मन समीर सलील चौधरी साजिद - वाजिद साधना सरगम सांवरियो परणाय साहिर लुधियानवी सी. रामचंद्र सुदर्शन फ़ाकिर सुनिधि चौहान सुरेश वाडकर सोनू निगम हज़ारिका हरिहरन हसरत जयपुरी हिंदी गीत मिश्रित हिंदी बोल मिश्रित हिंदी लिरिक्स- मिश्रित हिंदी सांग लिरिक्स मिश्रित हिमेश रेशमिया हेमंत कुमार