इस मतलब की दुनिया में कही मिलता सच्चा प्यार नहीं

इस मतलब की दुनिया में
कही मिलता सच्चा प्यार नहीं
देख बनाकर श्याम को साथी
इनसे सच्चा यार नहीं
इस मतलब की दुनिया में।।
भले ही मूर्त बन कर बैठा
पर है तेरे साथ खड़ा
आये संकट जब भी तुझ पर
तुम से पहले श्याम लड़ा
लोटा हो मायूस कभी कोई
ये ऐसा दरबार नहीं
देख बना कर श्याम को साथी
इन से सच्चा यार नहीं।।
जिसने शीश का दान दिया हो
उनको क्या तुम परखोगे
जो ना कृपा इनकी हो तो
पानी को भी तरसोगे
मोह माया से रीझता हो ये
ऐसा साहूकार नहीं
देख बना कर श्याम को साथी
इन से सच्चा यार नहीं।।
कहता ‘राज’ की दुःख अपना
धीरज ना खोना प्यारे
कही और ना जाना तुम बस
इनसे ही कहना प्यारे
श्याम को जिसने जित लिया
कभी होती उसकी हार नहीं
देख बना कर श्याम को साथी
इन से सच्चा यार नहीं।।
इस मतलब की दुनिया में
कही मिलता सच्चा प्यार नहीं
देख बनाकर श्याम को साथी
इनसे सच्चा यार नहीं
इस मतलब की दुनिया में।।
सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आये है भजन लिरिक्स : Saja Do Ghar Ko Gulshan Sa Lyrics

सजा दो घर को गुलशन सा
मेरे सरकार आये है
मेरे सरकार आये है
लगे कुटिया भी दुल्हन सी
लगे कुटिया भी दुल्हन सी
मेरे सरकार आये है
सजा दो घर को गूलशन सा
मेरे सरकार आये है।।
पखारो इनके चरणो को
बहा कर प्रेम की गंगा
बहा कर प्रेम की गंगा
बिछा दो अपनी पलको को
मेरे सरकार आये है
सजा दो घर को गूलशन सा
मेरे सरकार आये है।।
उमड़ आई मेरी आँखे
देख कर अपने बाबा को
देख कर अपने बाबा को
हुई रोशन मेरी गलियां
मेरे सरकार आये है
सजा दो घर को गूलशन सा
मेरे सरकार आये है।।
तुम आकर फिर नहीं जाना
मेरी इस सुनी दुनिया से
मेरी इस सुनी दुनिया से
कहूँ हर दम यही सब से
मेरे सरकार आये है
सजा दो घर को गूलशन सा
मेरे सरकार आये है।।
सजा दो घर को गुलशन सा
मेरे सरकार आये है
मेरे सरकार आये है
लगे कुटिया भी दुल्हन सी
लगे कुटिया भी दुल्हन सी
मेरे सरकार आये है
सजा दो घर को गूलशन सा
मेरे सरकार आये है।।